
नेशनल डेस्क : 2020 की NEET UG परीक्षा में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा हुआ था। इसमें एक आयुर्वेदिक डॉक्टर, जोधपुर AIIMS का एक फाइनल ईयर का मेडिकल स्टूडेंट और भरतपुर मेडिकल कॉलेज का एक ट्रेनी डॉक्टर शामिल थे। जयपुर पुलिस ने इस मामले का खुलासा करते हुए तीनों को गिरफ्तार कर लिया है। आइए जानते है इस खबर को विस्तार से…
कैसे हुआ फर्जीवाड़ा ?
जोधपुर एम्स के स्टूडेंट सचिन गोरा ने अपनी जगह डमी कैंडिडेट (सॉल्वर) को परीक्षा में बैठाया था। सचिन ने आवेदन में अपनी फोटो की जगह, 2019 की NEET क्वालीफाई कर चुके भरतपुर मेडिकल कॉलेज के स्टूडेंट अमित गोरा की फोटो लगा दी थी। सचिन और अमित दोनों ही भरतपुर जिले के रहने वाले हैं। इस फर्जीवाड़े के लिए 60 लाख रुपए का सौदा हुआ था। इस फर्जी परीक्षा के कारण सचिन को 144वीं रैंक मिली और वह जोधपुर एम्स में दाखिला पा गया।
इसमें कौन-कौन शामिल थे?
-सचिन गोरा – जोधपुर एम्स का MBBS फाइनल ईयर का छात्र।
-अमित गोरा – भरतपुर मेडिकल कॉलेज का स्टूडेंट, जिसने सचिन की जगह परीक्षा दी।
-सुभाष सैनी – आयुर्वेदिक डॉक्टर और हेल्थ ऑफिसर, जो इस दलाली का कनेक्शन था।
मामला कैसे सामने आया ?
सचिन के ही एक रिश्तेदार ने पुलिस को 20 दिन पहले शिकायत की। इसके बाद जयपुर पुलिस ने जांच शुरू की। सचिन को जोधपुर एम्स से और अमित को भरतपुर मेडिकल कॉलेज से गिरफ्तार किया गया। दलाल सुभाष सैनी को भी पुलिस ने दबोच लिया।
पुलिस की कार्रवाई…
जयपुर पुलिस ने सभी सबूत जुटा लिए हैं। जोधपुर एम्स और भरतपुर मेडिकल कॉलेज से और भी सबूत मांगे जा रहे हैं। पुलिस के अनुसार, सुभाष सैनी ने 2013 की परीक्षा में भी 65 लाख रुपए लेकर फर्जीवाड़ा किया था। तीनों आरोपियों को 13 जून तक पुलिस कस्टडी में रखा गया है।
क्या सवाल उठते हैं?
इस मामले से NEET परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं। छात्र और समाज में यह चिंता बढ़ गई है कि परीक्षा कैसे फर्जीवाड़े के लिए खुला मंच बन जाती है। यह घटना शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार और गड़बड़ी को दर्शाती है। जयपुर पुलिस की गिरफ्त में आए इस फर्जीवाड़े के आरोपी यह संदेश देते हैं कि NEET जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा में भी धोखाधड़ी हो रही है। यह शिक्षा और मेडिकल क्षेत्र के लिए एक गंभीर समस्या है, जिसे रोकना बेहद जरूरी है ताकि योग्य और मेहनती छात्रों को उचित मौका मिल सके।