
नेशनल डेस्क : क्या आपको पता है कि भारत का सबसे महंगा आम कौन सा है? कौन सी किस्मों के आमों की कीमत अधिक होती है? बता दें कि भारत में नूरजहां और कोहितूर की दुलर्भ किस्में सबसे महंगी मानी जाती हैं। यही नहीं, नूरजहां को दुनिया का सबसे बड़ा आम माना जाता है। एक आम की किस्म का नाम मुगल सल्तनत की बेगम और दूसरी का नवाब के नाम रखा गया है।
नूरजहां किस्म का आम मध्य प्रदेश और कोहितूर किस्म का आम पश्चिम बंगाल में पैदा होता है। यही नहीं, एक आम की कीमत ही लगभग 1000-1500 रुपये होती है। इन आमों का स्वाद बेहद खास होता है। बता दें कि कोहितूर का नाम कोह-ए-नूर के नाम पर रखा गया है।
नूरजहां आम मध्य प्रदेश के जिला अलीराजपुर के कट्ठीवाड़ा में उगाया जाता है। यह जिला अपने झरनों और बारिश के लिए भी प्रसिद्ध है। माना जाता है कि इस आम की किस्म को गुजरात के रास्ते अफगानिस्तान से लाकर उगाया गया था। स्थानीय किसान ऐसा नहीं मानते, उनका कहना है कि वे ही इस आम के एकमात्र उत्पादक हैं।

इस आम की किस्म को काफी दुर्लभ माना जाता है, जिसका सेवन लोग बड़े चाव के साथ करते हैं। सीमित उत्पादन के चलते इस आम की बिक्री सिर्फ मध्य प्रदेश और गुजरात में ही होती है। इस आम का वजन ढाई से साढ़े 3 किलोग्राम तक होता है। यह आम आकार में एक फुट तक का हो सकता है।
खास बात है कि इस आम का पौधा सिर्फ 12 फीट तक ही बढ़ता है। इस पौधे पर जनवरी की शुरुआत में ही फल लगने लगता है। इस आम की डिमांड इतनी है कि व्यापारी पहले ही उत्पादकों से बुकिंग करवा लेते हैं।
इस आम की किस्म को मल्लिका-ए-आम या आमों की रानी भी कहा जाता था। कुछ साल पहले इस आम की किस्म विलुप्त होने के कगार पर पहुंच गई थी, लेकिन मध्य प्रदेश सरकार प्रयासों से इसकी खेती का रकबा बढ़ाया गया। अच्छी कीमतों पर बिक्री के चलते सरकार किसानों को इसकी खेती के लिए प्रोत्साहन भी देती है।
वहीं, कोहितूर किस्म की बात करें तो कहा जाता है कि इस आम को हकीम अदा मोहम्मदी ने नवाब सिराजुद्दौला के लिए उगाया था। इसकी खेती मूलत: पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में होती है, जिसे बंगाल के पूर्व नवाबों की रियासत माना जाता है। उस दौर में यह आम सिर्फ अमीरों के लिए ही माना जाता था, आम लोग इसका स्वाद नहीं चख पाते थे।

एक आम की कीमत लगभग 1500 रुपये है। यह आम पक कर खुद शाखाओं से गिरता है। गिरते समय आम पर दाग न लगे, इसके लिए किसान जूट की बोरियां नीचे लगा देते हैं। यह आम इतना सॉफ्ट होता है कि इसे धातु के बजाय लकड़ी के चाकू से काटा जाता है। सरकार इस आम की खेती का रकबा बढ़ाने के लिए प्रयासरत है।
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