इंटरनेशनल डेस्क : 13 जून 2025 से शुरू हुआ ईरान-इजरायल युद्ध 12 दिन बार रुक गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ऐलान के बाद अब दोनों देशों में शांति को लेकर सहमति बन गई है। इजरायल ने ऑपरेशन राइजिंग लायन शुरू कर ईरान के सैन्य और परमाणु ठिकानों पर हमले किए थे। जवाब में ईरान ने भी इजरायल के कई शहरों पर मिसाइलें दागीं।
22 जून को अमेरिका की एंट्री इस लड़ाई में हुई थी। अमेरिका ने ऑपरेशन मिडनाइट हैमर चलाकर ईरान के 3 परमाणु ठिकानों पर हमला किया था। इस जंग में दोनों देशों के सैकड़ों लोगों की जान गई। कई शहरों को भारी नुकसान पहुंचा। कई सैन्य ठिकाने तबाह हुए। दोनों देशों को कितना नुकसान हुआ, इसके बारे में जान लेते हैं?
हमले में इजरायल के 200 फाइटर जेट्स शामिल रहे। इन्होंने 330 से ज्यादा हथियार ईरान पर गिराए। मुख्य तौर पर इजरायल ने नतांज, फोर्डो और इस्फहान परमाणु संयंत्र के अलावा कई सैन्य अड्डों को निशाना बनाया। वहीं, ईरान ने 450 से ज्यादा मिसाइलें और 1000 ड्रोन इजरायल पर दागे। ईरान के टारगेट पर मुख्य तौर पर तेल अवीव, हाइफा और बीर शेवा जैसे शहर रहे।
विभिन्न रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान में लगभग 650 से 800 लोग मारे गए। इसके अलावा 1800 से 3056 लोग घायल हुए। ईरान के कई वैज्ञानिक और सैन्य अधिकारी भी मारे गए। मारे गए लोगों में महिलाएं भी शामिल हैं।
वहीं, इजरायल में 24-30 लोग मारे गए। ये सभी लोग आम नागरिक थे। वहीं, 300-600 लोग घायल हुए। हूती और हिजबुल्लाह ईरान के साथ डटे दिखे। दोनों सहयोगियों ने इजरायल और अमेरिका पर हमले किए, जिसकी वजह से लाल सागर और यमन में तनाव बढ़ा। कई देशों ने अपने नागरिक इजरायल और ईरान से निकाले। भारत ने ही दोनों देशों से 1200 लोगों को निकाला।
इस जंग में G7 के लीडर्स इजरायल के समर्थन में रहे। हालांकि अमेरिका की जंग में सीधी भागीदारी को लेकर मतभेद रहे। एक अनुमान के अनुसार इस जंग में ईरान के बुनियादी ढांचे को लगभग 150-200 बिलियन डॉलर का नुकसान झेलना पड़ा। रिपोर्ट्स के मुताबिक इजरायल को 12 बिलियन डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा। जंग के बीच स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के बंद होने की बातें भी चलीं, जिससे तेल की कीमतें बढ़ीं।
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