
Reserve Bank of India : डिजिटल बैंकिंग को सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने की दिशा में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक बड़ा कदम उठाया है। आधार आधारित भुगतान प्रणाली (AEPS) से जुड़े फ्रॉड मामलों पर चिंता जताते हुए आरबीआई ने बैंकों को सख्त निर्देश दिए हैं। आपको बता दें कि अब अंगूठा लगाकर पैसे निकालने की सुविधा में कई सुरक्षा उपाय और जांच प्रक्रियाएं अनिवार्य कर दी गई हैं।
ATO को जोड़ने से पहले होगी सख्त जांच
आरबीआई के मुताबिक, कोई भी बैंक यदि AEPS सेवा के लिए किसी एजेंट टचपॉइंट ऑपरेटर (ATO) को अपने नेटवर्क में जोड़ना चाहता है, तो उससे पहले उस ऑपरेटर की KYC वेरिफिकेशन और बैकग्राउंड चेकिंग करना जरूरी होगा। यह प्रक्रिया बिलकुल उसी तरह होगी जैसे किसी नए ग्राहक की पहचान की जाती है।
हालांकि, यदि कोई ATO पहले से ही बैंक का बिजनेस सब-एजेंट रहा है और उसकी जांच हो चुकी है, तो उसे दोबारा वेरिफिकेशन से गुजरने की आवश्यकता नहीं होगी।
आरबीआई ने आधार सक्षम भुगतान प्रणाली (एईपीएस) टचपॉइंट संचालकों की उचित जांच के संबंध में निदेश जारी किए
RBI issues directions on Due Diligence of Aadhaar Enabled Payment System (AePS) Touchpoint Operatorshttps://t.co/entVBvDmvq— ReserveBankOfIndia (@RBI) June 27, 2025
तीन महीने की निष्क्रियता पर दोबारा KYC जरूरी
नए नियमों के तहत यदि कोई ATO लगातार तीन महीने तक निष्क्रिय रहता है यानी AEPS के जरिए कोई लेन-देन नहीं करता, तो दोबारा काम शुरू करने से पहले उसे फिर से KYC प्रक्रिया से गुजरना होगा। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी “स्लीपिंग एजेंट” सिस्टम में दोबारा घुसपैठ कर फर्जी ट्रांजैक्शन न कर पाए।
फ्रॉड मामलों पर RBI की चिंता
आरबीआई ने कहा कि बीते कुछ महीनों में ऐसे कई धोखाधड़ी के मामले सामने आए हैं, जहां ग्राहकों की पहचान चुराकर या उनके आधार डेटा का दुरुपयोग कर AEPS के जरिए गलत लेन-देन किए गए। इन घटनाओं ने AEPS सिस्टम की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
इन्हीं चिंताओं को ध्यान में रखते हुए RBI ने यह सख्त कदम उठाया है, ताकि डिजिटल बैंकिंग प्रणाली में ग्राहकों का भरोसा कायम रह सके।
कानूनी आधार और तकनीकी समीक्षा
आरबीआई द्वारा जारी किए गए ये दिशानिर्देश पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 की धारा 10(2) और 18 के अंतर्गत लागू किए गए हैं। इसके साथ ही आरबीआई ने यह भी स्पष्ट किया है कि AEPS से जुड़ी सेवाओं और ऑपरेटर्स की नीतियों व कार्यप्रणाली की समय-समय पर समीक्षा की जाएगी ताकि तकनीकी बदलावों के साथ सुरक्षा उपायों को भी सुदृढ़ किया जा सके।
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