
नई दिल्ली: सहकारिता मंत्रालय के सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी ने मंगलवार को नई दिल्ली स्थित PHD हाउस में आयोजित एक अहम कार्यशाला को संबोधित किया। यह कार्यशाला PACS (प्राथमिक कृषि ऋण समितियों) में उभरती तकनीकों और डिजिटलीकरण को लेकर आयोजित की गई थी। इसमें 12 राज्यों के PACS के 122 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम में PHDCCI के CEO रंजीत मेहता, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, NABARD, NCDC, IFFCO, KRIBHCO जैसे संस्थानों के प्रतिनिधि और विभिन्न राज्यों के अधिकारी शामिल हुए।
कार्यशाला का मुख्य फोकस
-PACS को तकनीकी रूप से मजबूत बनाना
-AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), इंटरनेट टेक्नोलॉजी, स्मार्ट कृषि उपकरणों का उपयोग
-फिनटेक डिजिटल सेवाएं और नीतिगत नवाचार
-तमिलनाडु, जम्मू-कश्मीर और मिज़ोरम में PACS की सफलता की कहानियों पर चर्चा

डॉ. भूटानी ने क्या कहा?
6 जुलाई 2021 को सहकारिता मंत्रालय का गठन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में हुआ, जो एक ऐतिहासिक कदम है। भारत में 1 लाख से अधिक PACS हैं जिनके पास 13 करोड़ से ज्यादा सदस्य हैं। भूटानी ने बताया कि अब PACS को सिर्फ कृषि तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि उन्हें 26 अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने के लिए सक्षम बनाया जा रहा है।
PACS के डिजिटलीकरण पर जोर
अब तक 3000 करोड़ रुपये खर्च कर PACS को डिजिटल बनाने की योजना पर काम हो चुका है। लक्ष्य है कि 80,000 PACS को कम्प्यूटरीकृत किया जाए और उन्हें भारत सरकार की योजनाओं से जोड़ा जाए। डिजिटलीकरण से PACS में पारदर्शिता, कुशलता और विश्वसनीयता बढ़ेगी। भूटानी ने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे रेलवे टिकट प्रणाली के डिजिटलीकरण से बड़ा बदलाव आया, वैसे ही PACS में भी ऐसा होगा।
PACS और सहकारी बैंकों की चुनौतियाँ
देश में 2000 में से 1900 बैंकिंग लाइसेंस सहकारी बैंकों के पास हैं, लेकिन तकनीकी रूप से पिछड़े होने के कारण इनकी बैंकिंग सेवाएं सीमित हैं। मंत्रालय RBI, वित्त मंत्रालय और आयकर विभाग के साथ मिलकर सहकारी बैंकों की समस्याओं को सुलझाने में लगा है।
राष्ट्रीय सहकारी डाटाबेस
मंत्रालय ने नेशनल कोऑपरेटिव डाटाबेस तैयार किया है जिससे केंद्र और राज्य सरकारों को योजना बनाने में मदद मिलती है और सहकारी संस्थाओं की खामियों को पहचाना जा सकता है।

ग्रामीण भारत को तकनीक से जोड़ने का संकल्प
किसानों को मौसम, आपदा, कीट प्रबंधन जैसी सलाह तकनीक के माध्यम से दी जा सकती है। PACS को समावेशी, पारदर्शी और आत्मनिर्भर बनाने के लिए नई तकनीकों को अपनाना ज़रूरी है। PACS को “वन स्टॉप शॉप” बनाकर ग्रामीण भारत की सभी जरूरतें पूरी करने की दिशा में काम हो रहा है।
“एक पेड़ मां के नाम” अभियान में सहभागिता
डॉ. भूटानी ने इस अवसर पर एक पौधा लगाया और कार्यक्रम में आए प्रतिभागियों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का भी दौरा किया।
कार्यक्रम का समापन
कार्यशाला के अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र दिए गए। कार्यक्रम में तकनीकी सत्र, अनुभव साझा करना, और समस्याओं पर चर्चा जैसे विभिन्न हिस्से शामिल थे। यह कार्यशाला सहकारी क्षेत्र के डिजिटलीकरण, तकनीकी बदलाव और ग्रामीण भारत के विकास की दिशा में एक बड़ा और ठोस कदम मानी जा रही है।
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