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Ashadha Purnima 2025: इस दिन रखा जाएगा आषाढ़ पूर्णिमा… जानिए शुभ मुहूर्त और व्रत से जुड़ी खास बातें

July 2, 2025

Ashadha Purnima 2025: इस दिन रखा जाएगा आषाढ़ पूर्णिमा… जानिए शुभ मुहूर्त और व्रत से जुड़ी खास बातें

Ashadha Purnima 2025: हिंदू पंचांग में आषाढ़ माह की पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व होता है। इसे गुरु पूर्णिमा या व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। यह दिन आध्यात्मिक साधना, गुरु पूजन और दान-पुण्य के लिए बेहद शुभ माना गया है। शास्त्रों में कहा गया है कि पूर्णिमा तिथि पर किए गए स्नान, दान, जप और तप से व्यक्ति को कई गुना फल प्राप्त होता है। 2025 में आषाढ़ पूर्णिमा कब है और इस दिन किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए? आइए जानते हैं…

आषाढ़ पूर्णिमा 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह की चतुर्दशी तिथि का समापन 9 जुलाई 2025 की रात 1:39 बजे होगा, जिसके बाद पूर्णिमा तिथि आरंभ हो जाएगी। इस वर्ष आषाढ़ पूर्णिमा 10 जुलाई 2025, बुधवार को मनाई जाएगी, क्योंकि पूर्णिमा तिथि उदया काल में रहेगी। पूर्णिमा तिथि का समापन 10 जुलाई की रात 2:08 बजे होगा।

स्नान-दान और पूजन का शुभ मुहूर्त:
सुबह 5:00 बजे से 9:00 बजे तक का समय अत्यंत शुभ है। इस दौरान स्नान, दान, पूजा-पाठ, गुरु पूजन और ध्यान-योग करना फलदायी माना गया है।

गुरु पूर्णिमा का धार्मिक महत्व

गुरु पूर्णिमा के दिन वेदों के रचयिता और महाभारत के लेखक महर्षि वेदव्यास जी का जन्म हुआ था, इसलिए इस दिन को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। यह दिन गुरु-शिष्य परंपरा की प्रतीक है। शिष्य अपने गुरु के चरणों में श्रद्धा निवेदित करते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इस दिन ब्रह्मज्ञान, वेद, उपनिषद और आध्यात्मिक साधना में रुचि रखने वाले लोग विशेष पूजा-अनुष्ठान करते हैं।

आषाढ़ पूर्णिमा पर क्या करें?

–प्रातःकाल पवित्र नदी या घर में स्नान कर व्रत का संकल्प लें।
–चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित करें और उनसे शांति व समृद्धि की कामना करें।
–अपने गुरुजनों का पूजन करें और उन्हें वस्त्र, फल अथवा दक्षिणा अर्पित करें।
–जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, धन आदि का दान करें।
–ध्यान, योग और मंत्र जाप जैसे आध्यात्मिक कार्य अवश्य करें।

क्यों खास है यह तिथि?

गुरु पूर्णिमा केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सामाजिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से भी बहुत महत्वपूर्ण है। यह दिन आत्मशुद्धि, श्रद्धा, भक्ति और ज्ञान प्राप्ति का प्रतीक है। गुरुओं के प्रति सम्मान प्रकट करने और उनके बताए मार्ग पर चलने का यह पावन अवसर सभी के जीवन को सार्थक बनाने का संदेश देता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। दैनिक सवेरा टाइम्स एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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