Last Updated: September 21, 2026

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चीन ने किरेन रिजिजू की टिप्पणी पर जताई आपत्ति, कहा- घरेलू मामलों में हस्तक्षेप बंद करें

July 4, 2025

चीन ने किरेन रिजिजू की टिप्पणी पर जताई आपत्ति, कहा- घरेलू मामलों में हस्तक्षेप बंद करें

नई दिल्ली: चीन ने भारत के केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू की उस टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताई है, जिसमें उन्होंने दलाई लामा को उनके उत्तराधिकारी का चयन करने का अधिकार दिया था। चीन ने भारत से तिब्बत (जिसे वे ‘शिजांग’ कहते हैं) से संबंधित मामलों में हस्तक्षेप बंद करने की अपील की है ताकि दोनों देशों के रिश्तों पर इसका नकारात्मक असर न पड़े।

चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने इस विषय पर एक प्रेस वार्ता में कहा कि भारत को तिब्बत से जुड़े मुद्दों पर अपनी प्रतिबद्धताओं का सम्मान करना चाहिए और चीन के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि भारत को अपने शब्दों और कार्यों में सावधानी बरतनी चाहिए और चीन-भारत संबंधों को सुधारने की दिशा में प्रभावी कदम उठाने चाहिए।

क्या कहा था किरेन रिजिजू ने?

3 जुलाई 2025 को किरेन रिजिजू ने कहा था कि दलाई लामा और उनके द्वारा स्थापित संस्था ही अगले दलाई लामा के बारे में निर्णय लेंगे, और इस फैसले में कोई बाहरी हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। यह टिप्पणी दलाई लामा के उत्तराधिकारी से संबंधित उनकी हाल की टिप्पणी पर आई थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि केवल ‘गादेन फोडरंग ट्रस्ट’ को उनके उत्तराधिकारी को मान्यता देने का अधिकार होगा। रिजिजू ने यह भी कहा कि वह दलाई लामा के 90वें जन्मदिन के समारोह में भारत सरकार का प्रतिनिधित्व करेंगे, जो 6 जुलाई को धर्मशाला में आयोजित होने वाला है। उन्होंने इस आयोजन को धार्मिक बताया और इसे राजनीति से अलग रखने की बात कही।

चीन का रुख

चीन ने पहले भी दलाई लामा के उत्तराधिकारी के चयन को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। माओ निंग ने कहा कि यह प्रक्रिया चीन के धार्मिक अनुष्ठानों, ऐतिहासिक परंपराओं और कानूनों के अनुसार होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि दलाई लामा और पंचेन लामा के उत्तराधिकारी के चयन की प्रक्रिया चीन की कड़ी निगरानी में होती है, और चीन सरकार को इस फैसले में पूरी भूमिका निभानी चाहिए।

भारत और चीन के रिश्ते

माओ निंग की टिप्पणियां भारत और चीन के बीच संबंधों में सुधार की कोशिशों को संदर्भित करती हैं। दोनों देशों के बीच पिछले कुछ सालों में सीमा विवाद के चलते तनाव बढ़ा था, लेकिन 2024 में दोनों देशों के नेताओं के बीच कई उच्चस्तरीय बैठकों के बाद रिश्तों में सुधार की दिशा में प्रयास तेज हुए हैं। चीन की ओर से यह बयान एक बार फिर दिखाता है कि वह तिब्बत और दलाई लामा से जुड़े मामलों पर भारत की टिप्पणियों को पसंद नहीं करता। हालांकि, भारत ने अपने मंत्री की टिप्पणियों के माध्यम से यह साफ किया कि वह धार्मिक मामलों में किसी प्रकार की बाहरी दबाव को नकारते हुए अपनी नीति पर कायम रहेगा।

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