इंटरनेशनल डेस्क। ब्रिक्स (BRICS) देशों का 17वां शिखर सम्मेलन 2025 में ब्राजील में आयोजित होने जा रहा है। इस साल का एजेंडा 2024 के कज़ान शिखर सम्मेलन की घोषणा की भावना को आगे बढ़ाते हुए “बहुपक्षवाद को मजबूत करने और वैश्विक विकास व सुरक्षा को न्यायसंगत बनाने” पर केंद्रित होगा। साथ ही, वैश्विक शासन प्रणाली में बदलाव पर सहमति को और गहरा किया जाएगा।
ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) दुनिया की सबसे तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में से हैं और अंतरराष्ट्रीय मंच पर इनकी भूमिका लगातार बढ़ रही है। यह समूह वैश्विक आर्थिक सुधार, सुरक्षा और विकास से जुड़े मुद्दों पर एक साझा रुख अपनाता है। इस शिखर सम्मेलन में सदस्य देश आपसी सहयोग बढ़ाने, व्यापार और निवेश को प्रोत्साहित करने और वैश्विक शांति व स्थिरता के लिए नई रणनीतियों पर चर्चा करेंगे।
भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार, 2 जुलाई से पांच देशों की यात्रा पर निकल चुके हैं, जहां वे ब्राजील में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत वैश्विक दक्षिण के कई प्रमुख देशों के साथ अपने संबंधों को बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। भारत की विदेश नीति में BRICS एक प्रमुख स्तंभ रहा है, और भारत लगातार बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग को बढ़ावा देता आया है।
वही दूसरी ओर, गौरतलब है कि रूस के राष्ट्रपति पुतिन भी इस बार ब्रिक्स में शिरकत नहीं करेंगे और चीन ने बुधवार (2 जुलाई, 2025) को कहा कि प्रधानमंत्री ली छ्यांग इस सप्ताह के अंत में ब्राजील में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। चीन अन्य ब्रिक्स सदस्यों के साथ व्यावहारिक आर्थिक और व्यापार सहयोग को गहरा करने पर बहुत महत्व देता है। हाल के वर्षों में, सभी पक्षों के ठोस प्रयासों के कारण, ब्रिक्स आर्थिक और व्यापार सहयोग के तंत्र में लगातार सुधार हुआ है, और उनके आर्थिक और व्यापार सहयोग का बंधन लगातार मजबूत हुआ है। यही कारण है कि मई में ब्राजील के ब्रासीलिया में आयोजित 15वीं ब्रिक्स व्यापार मंत्रियों की बैठक में, चीन ने बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली, डिजिटल अर्थव्यवस्था प्रशासन, व्यापार और सतत विकास तथा अन्य प्रमुख मुद्दों को मजबूत करने पर सदस्यों के बीच आम सहमति को सक्रिय रूप से बढ़ावा दिया, जिससे ब्रिक्स आर्थिक और व्यापार सहयोग का सार समृद्ध हुआ। विशेष रूप से, चल रहे वैश्विक व्यापार तनावों के बीच, सभी पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि ब्रिक्स सदस्यों को संयुक्त रूप से बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली को बनाए रखना चाहिए, एकतरफावाद और संरक्षणवाद का विरोध करना चाहिए, तथा विकासशील देशों और सदस्यों के वैध अधिकारों और हितों की रक्षा करनी चाहिए। चीन नेताओं की बैठक में बनी सहमति को पूरी तरह लागू करने और व्यापक ब्रिक्स आर्थिक और व्यापार सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए अन्य ब्रिक्स सदस्यों के साथ काम करने के लिए तैयार है।
ब्रिक्स का बढ़ता वैश्विक प्रभाव
ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) दुनिया की सबसे तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में से हैं और अंतरराष्ट्रीय मंच पर इनकी भूमिका लगातार बढ़ रही है। यह समूह वैश्विक आर्थिक सुधार, सुरक्षा और विकास से जुड़े मुद्दों पर एक साझा रुख अपनाता है। इस शिखर सम्मेलन में सदस्य देश आपसी सहयोग बढ़ाने, व्यापार और निवेश को प्रोत्साहित करने और वैश्विक शांति व स्थिरता के लिए नई रणनीतियों पर चर्चा करेंगे। ब्रिक्स न केवल पांच महाशक्तियों का संगठन है, बल्कि यह उन सभी देशों की आवाज़ है जो पश्चिमी प्रभुत्व वाले वैश्विक संरचना में अधिक संतुलन और न्याय की मांग कर रहे हैं। जलवायु संकट, वैश्विक व्यापार नियम, डिजिटल परिवर्तन और वैश्विक दक्षिण के अधिकारों को लेकर BRICS की भूमिका निर्णायक बनती जा रही है।
17वां ब्रिक्स सम्मेलन यह संदेश देता है कि वैश्विक विकास केवल कुछ राष्ट्रों के इर्द-गिर्द नहीं घूमना चाहिए, बल्कि एक समावेशी, निष्पक्ष और बहुपक्षीय ढांचे के माध्यम से आगे बढ़ना चाहिए। BRICS की एकजुटता न केवल सदस्य देशों के लिए, बल्कि पूरे वैश्विक दक्षिण के लिए आशा की किरण बनकर उभरी है। यह सम्मेलन एक बार फिर सिद्ध करता है कि BRICS न सिर्फ़ एक आर्थिक मंच है, बल्कि वैश्विक न्याय, समानता और स्थायी शांति की दिशा में अग्रसर एक प्रभावशाली राजनीतिक मंच भी है।
(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग) (लेखक—देवेंद्र सिंह)
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