Last Updated: September 28, 2026

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ब्रिक्स: वैश्विक सहयोग और नई विश्व व्यवस्था की ओर

July 10, 2025

ब्रिक्स: वैश्विक सहयोग और नई विश्व व्यवस्था की ओर

हाल ही में ब्राजील के रियो डे जनेरियो में आयोजित 17वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन ने विकासशील देशों के बढ़ते वैश्विक प्रभाव और बहुपक्षवाद को बढ़ावा देने के ब्रिक्स के संकल्प को रेखांकित किया। CGTN हिंदी के संवाददाता अखिल पाराशर ने दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अभिषेक प्रताप सिंह के साथ विशेष साक्षात्कार में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के प्रमुख उद्देश्यों, घोषणा पत्र के महत्वपूर्ण बिंदुओं और ब्रिक्स के भविष्य के दृष्टिकोण पर चर्चा की।

देशबंधु कॉलेज में ग्लोबल पॉलिटिक्स पढ़ाने वाले और अंतर्राष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ प्रोफेसर सिंह ने बताया कि ब्रिक्स पश्चिमी देशों के वैश्विक प्रभुत्व के समक्ष अपनी मजबूत भूमिका स्थापित करने का प्रयास कर रहा है। ब्रिक्स का मुख्य उद्देश्य लंबे समय से विकासशील देशों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में उभरना रहा है। प्रोफेसर सिंह के अनुसार, “अगर हम देखें तो उसके 11 सदस्य हैं और लगभग 40% के पास आबादी दुनिया की इनके पास है और दुनिया की आधी जीडीपी पर इनका कंट्रोल है।” इस सम्मेलन का मुख्य ध्येय बहुपक्षवाद को बढ़ावा देना था, विशेषकर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के कार्यकाल में बढ़ते एकपक्षवाद के दौर में।

डीयू प्रोफेसर अभिषेक प्रताप सिंह ने बताया कि ब्रिक्स का एक महत्वपूर्ण एजेंडा “ग्लोबल साउथ कोऑपरेशन” भी है, जिसमें विकासशील देशों के बीच बेहतर आर्थिक सहयोग, निवेश और राजनीतिक समझ पर जोर दिया गया है। 2025 की थीम में भी यह स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है कि ब्रिक्स एक ग्लोबल साउथ कोऑपरेशन और विकासशील देशों का एक महत्वपूर्ण संगठन बनने की दिशा में काम कर रहा है। ब्रिक्स घोषणा पत्र की मुख्य बातों पर प्रकाश डालते हुए प्रोफेसर सिंह ने बताया कि इसमें जलवायु परिवर्तन और स्वच्छ ऊर्जा को लेकर विकासशील देशों के साथ अपनाई जा रही “भेदभावपूर्ण नीति” पर चर्चा हुई।

ब्रिक्स ने यूरोपीय संघ द्वारा लगाए गए कार्बन बॉर्डर टैक्स की कड़ी निंदा की, क्योंकि इससे विकासशील देशों के उत्पादों को यूरोप में आने से रोका जाता है और उन्हें “बहुत नुकसान होता है।” ब्रिक्स ने यूरोपीय संघ से इस पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया।  साल 2018 में चीन के फुतान विश्वविद्यालय के ब्रिक्स स्कूल के फैलो रह चुके डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह ने यह भी कहा कि इस बार के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में वैश्विक सप्लाई चेन को और अधिक विश्वसनीय और मजबूत बनाने पर जोर दिया गया, जिसमें विकासशील देश प्रमुख हितधारक हो सकते हैं। इसके अलावा, वैश्विक स्वास्थ्य सुधारों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर भी गंभीर चर्चा हुई।

उनका मानना है कि ब्रिक्स समूह ने वैश्विक जलवायु नेतृत्व के एजेंडे को अपनाने और आगे बढ़ाने का भी प्रयास किया है, खासकर अमेरिकी विदेश नीति द्वारा इस क्षेत्र में अपनी भूमिका को सीमित करने के बाद। भारत ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि कुछ देश महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों और अपनी आर्थिक प्रौद्योगिकियों का “हथियारकरण” कर रहे हैं, जिससे विकासशील देशों को भारी परेशानी होती है। साइबर सुरक्षा के संदर्भ में भी इस मुद्दे पर बातचीत हुई। पश्चिमी देशों की वैश्विक शक्ति पर ब्रिक्स के प्रभाव पर बोलते हुए, प्रोफेसर सिंह ने कहा, “जब ब्रिक्स का उदय हुआ था तो इसका एजेंडा यही था कि किस प्रकार से हम एक विकसित देशों के सहयोग से एक गैर-पश्चिमी आर्थिक व्यवस्था को स्थापित कर सकें।”

ब्रिक्स बैंक के माध्यम से मानव विकास और जलवायु परिवर्तन पर सहयोग हुआ है, लेकिन अभी “और ज्यादा काम किया जाना जरूरी है।” कोविड-19 महामारी के बाद वैश्विक मंदी के कारण आर्थिक संसाधन जुटाना ब्रिक्स के सामने एक बड़ी समस्या है।प्रोफेसर अभिषेक प्रताप सिंह का मानना है कि हाल के घोषणा पत्र में ब्रिक्स देशों ने आतंकवाद और आतंकवाद के वित्तपोषण को लेकर एक “बहुत ही ठोस संदेश दिया है,” जिसकी भारत वकालत कर रहा है। ब्रिक्स ने इस बात पर भी ध्यान केंद्रित किया है कि दुनिया के देश “कहीं न कहीं जो दोहरा मापदंड अपना रहे हैं और जो ब्रिक्स देशों की विशेष नीति के खिलाफ अपना रहे हैं, उनको कैसे खत्म किया जाए?”

ब्रिक्स के सामने मुख्य चुनौती “एकपक्षीय विश्व बनाम बहुपक्षीय विश्व की है।” इसे आर्थिक रूप से प्रासंगिक बनना होगा, जिसके बाद यह राजनीतिक रूप से भी प्रासंगिक संगठन बन पाएगा, जिसमें सभी सदस्यों का सहयोग आवश्यक है। कुल मिलाकर, 17वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन बहुपक्षवाद को बढ़ावा देने, ग्लोबल साउथ के हितों की रक्षा करने और एक अधिक न्यायसंगत वैश्विक व्यवस्था बनाने के ब्रिक्स के चल रहे प्रयासों का एक प्रमाण है। हालांकि, विस्तार से उत्पन्न होने वाली चुनौतियों और सदस्य देशों के बीच अधिक एकता की आवश्यकता को स्वीकार करते हुए, ब्रिक्स पश्चिमी प्रभुत्व को चुनौती देने और एक महत्वपूर्ण गैर-पश्चिमी मंच के रूप में उभरने की दिशा में काम कर रहा है।

(अखिल पाराशर, चाइना मीडिया ग्रुप (CGTN हिन्दी), बीजिंग)

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