चीन में अकसर हम आधुनिक यातायात संसाधनों के बारे में बात करते हैं। जिसमें तेज गति की ट्रेनों और महंगी कारों की चर्चा अकसर होती है। साथ ही मैग्लेव व चीन द्वारा तैयार बड़े विमान भी विश्व का ध्यान आकर्षित करते हैं। लेकिन चीन में आधुनिक संसाधनों के साथ-साथ परंपरागत यातायात को नज़रअंदाज नहीं किया गया है। इसकी बानगी हमें शानतोंग प्रांत के छ्वीफू जैसे छोटे कस्बे में देखने को मिली। वहां पर तमाम ऐसे वाहन दिखे जो हमें पेइचिंग, शांगहाई जैसे शहरों में नहीं दिखते हैं।
गौरतलब है कि यह क्षेत्र महान चीनी दार्शनिक कंफ्यूशियस का जन्मस्थान है। इसके आसपास हमें कई परंपरागत चीज़ें देखने को मिली। मसलन हमें घोड़ा गाड़ी, टुक-टुक व ऑटो रिक्शा आदि चलते हुए दिखे। जिनमें सवारियों को बैठते और उतरते हुए देखने पर भारत की याद आ गयी। क्योंकि भारत व कई अन्य देशों में अब भी इस तरह के यातायात मोड का खूब इस्तेमाल होता है। लेकिन ये आमतौर पर चीन में नज़र नहीं आते हैं।
छ्वीफू के भ्रमण के दौरान, हमारा ध्यान घोड़ा गाड़ी व ऑटो रिक्शा ने अपनी ओर खींचा। कंफ्यूशियस के बारे में जानने के लिए उत्सुक और परंपरागत चीजों से लगाव रखने वाले लोग यहां बहुत आते हैं। जैसा कि हम जानते हैं कि चीन में पर्यटन को बढ़ावा देने पर काफी ध्यान दिया गया है। इसलिए कंफ्यूशियस का जन्मस्थान भी लोकप्रिय पर्यटक स्थल बन चुका है। यहां पहुंचने वाले लोग घोड़ा गाड़ी की सवारी करने के साथ-साथ विभिन्न रंग के रिक्शे आदि में बैठने का आनंद लेते हैं। क्योंकि बड़े महानगरों से आने वालों के लिए यह कुछ अलग सा अनुभव होता है। जिसकी वजह से वे इनका इस्तेमाल करने के लिए उत्साहित रहते हैं। और हां इनका किराया टैक्सी की तुलना में काफी कम होता है। इसलिए ये न केवल सस्ते होते हैं, बल्कि परंपरागत भी होते हैं।
कहा जा सकता है कि मॉडर्न हो रहे चीन में अब भी तमाम परंपरागत चीज़ें और संसाधन मौजूद हैं। जिन्हें देखते हुए लगता है कि चीन आधुनिकता के साथ-साथ परंपरा और संस्कृति से जुड़ा हुआ देश है।
(अनिल पांडेय, चाइना मीडिया ग्रुप, छ्वीफू शानतोंग)