Last Updated: September 25, 2026

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श्रावण मास का पहला सोमवार आज : चौथे ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर मंदिर में उमड़ी शिवभक्तों की भीड़, जयकारों से गूंज उठा धाम

July 14, 2025

श्रावण मास का पहला सोमवार आज : चौथे ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर मंदिर में उमड़ी शिवभक्तों की भीड़, जयकारों से गूंज उठा धाम

Savan First Monday : मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में स्थित पवित्र तीर्थ नगरी ओंकारेश्वर में श्रावण मास के पहले सोमवार की बड़ी धूम देखने को मिली। बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक और चौथे ज्योतिर्लिंग माने जाने वाले ओंकारेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।

रात से ही कतारों में खड़े दिखाई दिए श्रद्धालु-
श्रद्धालुओं की यह आस्था सुबह से ही दिखाई देने लगी। सुबह 4 बजे मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। सुबह 5 बजे भव्य आरती का आयोजन किया गया, जिसमें शामिल होने के लिए श्रद्धालु रात से ही कतारों में खड़े दिखाई दिए। मंदिर पहुंचने से पहले श्रद्धालुओं ने पवित्र नर्मदा नदी में स्नान किया। पूरा मंदिर परिसर बोल बम, जय ओंकार और हर-हर महादेव के नारों से गूंज उठा।

नगर भ्रमण और नौका विहार-
श्रावण मास में भगवान शिव की पूजा और जलाभिषेक का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस माह में महादेव अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाते हैं। यही वजह है कि सुबह से रात तक श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रहती है। इस बार श्रावण-भाद्रपद मास में कुल 6 सोमवार पड़ रहे हैं। प्रत्येक सोमवार को ओंकारेश्वर महाराज की शाही सवारी निकाली जाएगी, जिसमें नगर भ्रमण और नौका विहार शामिल होगा। इस दौरान गुलाल महोत्सव भी मनाया जाएगा।

शोभायात्रा में शामिल होंगे भक्त-
पहले सोमवार को शाम 4 बजे ओंकारेश्वर महाराज की शाही सवारी नगर भ्रमण और फिर नर्मदा नदी में नौका विहार करेगी। गुलाल से सजे भक्त नाचते-गाते और जयकारे लगाते हुए इस शोभायात्रा में शामिल होंगे।

प्रशासन ने की विशेष व्यवस्था-
श्रावण मास में श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने विशेष व्यवस्था की है। मंदिर पहुंचने के लिए झूलापुल और पुरानापुल दोनों मार्गों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही सुचारू रूप से जारी रही। भारी उमस और गर्मी के बावजूद श्रद्धालु भक्ति और आस्था में डूबे कतारों में खड़े दिखाई दिए।

शयन आरती का विशेष महत्व-
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव दिन भर ब्रह्मांड में विचरण करते हैं, लेकिन रात में ओंकार पर्वत पर शयन करते हैं। इसलिए यहां शयन आरती का विशेष महत्व है।

 

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