शिमला: हिमाचल प्रदेश में मानसून का कहर जारी है। प्रदेश के मंडी जिले में स्थित चंडीगढ़-मनाली राष्ट्रीय राजमार्ग एक बार फिर बंद हो गया है। चार मील क्षेत्र में हुए दो ताजा भूस्खलनों ने इस महत्वपूर्ण मार्ग को पूरी तरह से बाधित कर दिया है। रात और सुबह हुए पहाड़ी धसकाव ने सड़क को मलबे से ढक दिया, जिससे वाहनों की आवाजाही रुक गई है। इस मार्ग पर पिछले तीन दिनों से लगातार पत्थर गिर रहे हैं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) की टीमें मलबा हटाने के लिए दिन-रात काम कर रही हैं, लेकिन मौसम की मार के चलते राहत कार्यों में बार-बार बाधा आ रही है। चंडीगढ़-मनाली मार्ग से मनाली व रोहतांग की ओर जा रहे पर्यटक घंटों जाम में फंसे हैं।
प्रदेश भर में सड़क नेटवर्क पर भारी असर पड़ा है। लोक निर्माण विभाग के अनुसार, हिमाचल में इस समय 191 सड़कें बंद पड़ी हैं। लगातार हो रही बारिश बहाली कार्यों को मुश्किल बना रही है।
-भारी बारिश का अलर्ट, लोगों को सतर्क रहने की अपील
भारतीय मौसम विभाग ने दो जिलों कांगड़ा और सिरमौर के लिए आज भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इन क्षेत्रों में जलभराव और निचले इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बनने की आशंका है। वहीं, मंडी, शिमला और सोलन जिलों में येलो अलर्ट घोषित किया गया है। आने वाले दिनों में अधिकांश जिलों में वर्षा की चेतावनी दी गई है, जिससे स्थिति और बिगड़ सकती है।
-98 लोगों की जान गई, 770 करोड़ की क्षति
इस मानसून सीजन में अब तक हिमाचल प्रदेश में 98 लोगों की जान जा चुकी है। इनमें से 24 मौतें प्राकृतिक आपदाओं जैसे कि भूस्खलन, बाढ़ और बादल फटने से हुई हैं। इसके अतिरिक्त 41 लोगों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में दर्ज की गई है। अन्य मौतों में डूबना, बिजली का झटका, सांप के काटने और ऊंचाई से गिरना शामिल हैं। वहीं, 34 लोग अभी भी लापता हैं, जिनकी तलाश में राहत दल लगातार जुटे हुए हैं।
राज्य सरकार के अनुसार, अब तक करीब 770 करोड़ रुपये की संपत्ति सरकारी और निजी बारिश और भूस्खलन से क्षतिग्रस्त हो चुकी है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें और मौसम विभाग के दिशा-निर्देशों का पालन करें।
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