Last Updated: November 5, 2026

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भिखारियों से विवाद के चलते गई इस देश के मंत्री की कुर्सी, आखिर किस बात पर देना पड़ा इस्तीफा?

July 16, 2025

भिखारियों से विवाद के चलते गई इस देश के मंत्री की कुर्सी, आखिर किस बात पर देना पड़ा इस्तीफा?

इंटरनेशनल डेस्क: क्यूबा में एक महिला मंत्री को अपने बयान की वजह से इस्तीफा देना पड़ गया। दरअसल महिला मंत्री के बयान पर पूरे देश में हंगामा मच गया और बात इतनी बढ़ी कि मंत्री को कुर्सी छोड़नी पड़ी। क्यूबा के राष्ट्रपति ने भी उनके बयान की आलोचना की है। लोगों का विरोध इतना बढ़ गया कि सोशल मीडिया पर राष्ट्रपति को मंत्री के रिजाइन करने के बारे में जानकारी साझा करनी पड़ी।

दरअसल श्रम मंत्री मार्ता एलेना फीतो केबरेरा ने भिखारियों को लेकर बयान जारी किया था। उन्होंने कहा था कि क्यूबा में फिलहाल कोई भिखारी नहीं है। लोग सिर्फ और सिर्फ दिखावा करने के लिए भिखारी होने का दावा कर रहे हैं। दरअसल सोमवार को केबरेरा ने नेशनल असेंबली समिति के आगे चौंकाने वाला बयान दिया था। केबरेरा ने कहा था कि हमने कई ऐसे भिखारी देखें हैं।

उनके हाथ और कपड़े देखने पर लगता है कि वे भिखारी होने का दावा कर रहे हैं। वे असल में भिखारी नहीं हैं, सिर्फ और सिर्फ दिखावा कर रहे हैं। इसके अलावा केबरेरा ने कहा कि लोग भीख मांगने के बाद शराब पीते हैं। देखते ही देखते केबरेरा का ये बयान सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो गया था। लोगों ने भी इसको लेकर विरोध जाहिर किया था।

लोगों ने की थी कार्रवाई की मांग

लोगों ने लगातार प्रदर्शन कर श्रम मंत्री फीतो के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। अब भारी दबाव और विरोध के बाद केबरेरा को रिजाइन करना पड़ा है। राष्ट्रपति मिगुएल डियाज कैनाल ने भी अपने मंत्री के बयान को शर्मनाक करार दिया है।

लोगों को मिल रही नाममात्र पेंशन

दरअसल क्यूबा में आर्थिक हालात लगातार खराब होते जा रहे हैं। कुछ साल पहले क्यूबा की आर्थिक स्थिति ठीक थी। भिखारियों की संख्या न के बराबर थी, लोग बेघर नहीं थे। अब हालात बदल चुके हैं। क्यूबा में गरीबी तेजी से पांव पसारती जा रही है। सामाजिक सुरक्षा लगातार कम हो चुकी है।

जो लोग रिटायर हो रहे हैं, उनको सिर्फ 2000 क्यूबा पेसो (5 अमेरिकी डॉलर) प्रति माह की दर से पेंशन दी जा रही है। बताया जा रहा है कि इन पैसों से अंडे की एक कॉर्टन भी नहीं आती। सूत्रों के मुताबिक काफी लोग ऐसे हैं, जिनके परिजन विदेश में काम करते हैं। सिर्फ इन्हीं लोगों की हालत कुछ ठीक है।

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