Amarnath Yatra 2025 : अमरनाथ यात्रा के 18वें दिन तीर्थयात्रियों की संख्या तीन लाख को पार करने की उम्मीद है। रविवार को 4,388 तीर्थयात्रियों का एक और जत्था जम्मू से कश्मीर के लिए रवाना हुआ। यह यात्रा कड़ी सुरक्षा के बीच हो रही है। अब तक 2.75 लाख से ज़्यादा तीर्थयात्री बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके हैं। जम्मू स्थित भगवती नगर यात्री निवास से 4,388 तीर्थयात्री कश्मीर पहुंचते हैं, जबकि प्रतिदिन चार गुना ज़्यादा तीर्थयात्री सीधे यहां पहुंचते हैं और या तो ट्रांजिट कैंपों या दोनों आधार शिविरों में पंजीकरण कराते हैं। रविवार को यह संख्या तीन लाख को पार करने की उम्मीद है।
इस बार कड़ी है सुरक्षा
सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस, बीएसएफ, सीआरपीएफ, एसएसबी, सीआईएसएफ और अन्य सुरक्षाकर्मी जम्मू से बालटाल और पहलगाम तक के दो आधार शिविरों और बालटाल व पहलगाम से अमरनाथ गुफा तक के दो मार्गों पर 24 घंटे तैनात हैं। सेना ने यात्रा ड्यूटी पर पहले से तैनात सीएपीएफ की 180 अतिरिक्त कंपनियों के अलावा 8,000 से ज़्यादा विशेष बल तैनात किए हैं।
हर 5 मीटर पर तैनात हैं जवान
यात्रा मार्ग पर हर पांच मीटर पर विभिन्न केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) इकाइयों के पूरी तरह से सशस्त्र जवान तैनात हैं, और इस असाधारण सतर्कता ने इस वर्ष हिमालयी अमरनाथ गुफा मंदिर के दर्शन के लिए तीर्थयात्रियों की आस्था को और मज़बूत किया है। अधिकारियों ने इस वर्ष की अमरनाथ यात्रा के लिए व्यापक बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की है, क्योंकि यह यात्रा 22 अप्रैल को पहलगाम की बेसरन घाटी में हुए भीषण हमले के बाद हो रही है, जिसमें पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों ने आस्था के आधार पर 26 निर्दोष लोगों की हत्या कर दी थी।
2 काफिलों में रवाना हुए यात्री
एक अधिकारी ने बताया, “आज भगवती नगर यात्री निवास से दो सुरक्षा काफिलों में 4,388 तीर्थयात्रियों का एक और जत्था घाटी के लिए रवाना हुआ। 1,573 तीर्थयात्रियों को लेकर 64 वाहनों का पहला सुरक्षा काफिला सुबह 3.30 बजे बालटाल आधार शिविर के लिए रवाना हुआ, जबकि 115 वाहनों का दूसरा सुरक्षा काफिला सुबह 4 बजे नुनवान (पहलगाम) आधार शिविर के लिए रवाना हुआ।”
इस बार 38 दिनों में समाप्त होगी यात्रा
इस वर्ष, तीर्थयात्रा 3 जुलाई को शुरू हुई और 38 दिनों के बाद 9 अगस्त को समाप्त होगी, जो श्रावण पूर्णिमा और राखी के दिन है। तीर्थयात्री कश्मीर हिमालय में समुद्र तल से 3888 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पवित्र गुफा तक या तो पारंपरिक पहलगाम मार्ग या छोटे बालटाल मार्ग से पहुंचते हैं।
हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध नहीं
पहलगाम मार्ग का उपयोग करने वाले लोग चंदनवाड़ी, शेषनाग और पंचतरणी होते हुए गुफा मंदिर तक पहुंचते हैं और पैदल 46 किमी की दूरी तय करते हैं। गुफा मंदिर तक पहुंचने में तीर्थयात्रा में चार दिन लगते हैं। और, छोटे बालटाल मार्ग का उपयोग करने वालों को गुफा तीर्थ स्थल तक पहुंचने के लिए 14 किमी की दूरी तय करनी पड़ती है और दर्शन के बाद उसी दिन आधार शिविर लौटना पड़ता है। सुरक्षा कारणों से इस वर्ष तीर्थयात्रियों के लिए कोई हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध नहीं है।