Last Updated: November 7, 2026

Dainik Savera Times Logo

चीन: जापानी आक्रमण के विरुद्ध युद्ध की विजय की 80वीं वर्षगांठ को क्यों मनाना चाहिए?

July 21, 2025

चीन: जापानी आक्रमण के विरुद्ध युद्ध की विजय की 80वीं वर्षगांठ को क्यों मनाना चाहिए?

18 सितम्बर 1931 को जब जापानी सेना ने पूर्वोत्तर चीन पर आक्रमण किया था, से लेकर 2 सितम्बर 1945 को जब जापान ने औपचारिक रूप से बिना शर्त आत्मसमर्पण पत्र पर हस्ताक्षर किये थे, 14 वर्षों की कठिन लड़ाई के बाद, चीनी जनता ने अंततः जापानी आक्रमण विरोधी युद्ध में विजय प्राप्त की थी। मुक्ति प्राप्त होने के बाद चीन ने आधिकारिक तौर पर 3 सितम्बर को जापानी आक्रमण के विरुद्ध युद्ध का विजय दिवस घोषित किया। इस वर्ष 3 सितम्बर को चीन जापानी आक्रमण विरोधी युद्ध और विश्व फासीवाद विरोधी युद्ध की विजय की 80वीं वर्षगांठ मनाने के लिए सैन्य परेड आयोजित करेगा, और इसके साथ भी ताइवान की मुक्ति की 80वीं वर्षगांठ मनाने के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

जापानी आक्रमण के विरुद्ध प्रतिरोध के युद्ध की समाप्ति के 80 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन चीनी लोगों को आक्रमण और दमन के दुखद ऐतिहासिक अपमान को कभी नहीं भूलना चाहिए, न ही उन वीरतापूर्ण और अडिग संघर्षों और महान बलिदानों को भूलना चाहिए जो उनके पूर्वजों ने विदेशी शत्रुओं के विरुद्ध लड़े थे। 80 साल पहले, चीनी लोगों ने 35 मिलियन लोगों की जान की कीमत पर प्रतिरोध युद्ध में जीत हासिल की थी। आज चीनी लोगों को अपनी राष्ट्रीय रक्षा क्षमता दिखाकर दुनिया को बताना होगा कि वह युग जब चीनी राष्ट्र दूसरों के शासन के अधीन था, हमेशा के लिए चला गया है, और चीन की शक्तिवान ताकत विश्व शांति और स्थिरता बनाए रखने की आधारशिला है। 3 सितंबर को आयोजित होने वाले सैन्य परेड में न केवल राष्ट्रीय रक्षा विज्ञान और प्रौद्योगिकी में चीन की प्रगति को प्रदर्शित किया जाएगा, बल्कि दुनिया को यह भी दिखाया जाएगा कि आधुनिक चीनी सेना किसी भी चुनौती का जवाब देने और राष्ट्रीय संप्रभुता और अपने लोगों के स्थिर जीवन की रक्षा करने में पूरी तरह सक्षम है।

जापानी आक्रमण के विरुद्ध युद्ध में चीनी जनता ने पिछड़े हथियारों और उपकरणों से शक्तिशाली दुश्मन को पराजित किया, जिस ने न केवल चीनी राष्ट्रीय भावना को जागृत किया और चीनी लोगों के राष्ट्रीय आत्मविश्वास को बढ़ाया, बल्कि बाद के राष्ट्रीय पुनरोद्धार की नींव भी रखी। युद्ध की जीत के बाद, चीनी लोगों ने चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व में समाजवादी समाज की स्थापना की, और अर्थव्यवस्था, सैन्य, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, कूटनीति और अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कीं। चीन अब विश्व की सबसे बड़ी विनिर्माण शक्ति बन गया है और उसने परिवहन, संचार, एयरोस्पेस, हरित ऊर्जा, क्वांटम प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता में विश्व में अग्रणी स्थान प्राप्त कर लिया है। चीन की बेल्ट एंड रोड पहल ने अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का एक नया पैटर्न बनाया है और इसमें शामिल देशों की अर्थव्यवस्था और आजीविका में बड़ा सुधार किया है। सौ वर्षों में अभूतपूर्व परिवर्तन का सामना करते हुए, चीन ने हमेशा जन-केंद्रित विकास दर्शन का पालन कर सभी लोगों को आर्थिक विकास के फल साझा करने की कोशिश की है। साथ ही, इसने खुलेपन को बढ़ाने के लिए शक्तिशाली उपायों के साथ वैश्वीकरण और बहुपक्षवाद की दृढ़ता से रक्षा की है।

नये चीन की स्थापना, विशेषकर सुधार और खुलेपन के बाद से, चीन का आर्थिक निर्माण तेजी से विकसित हुआ है और वैज्ञानिक और तकनीकी ताकत लगातार आगे बढ़ रही है। चीन वर्तमान में विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है तथा सर्वाधिक उन्नत वैज्ञानिक एवं तकनीकी स्तर वाले देशों में से एक है। हालांकि, अंतर्राष्ट्रीय शत्रुतापूर्ण ताकतें विभिन्न रूपों में चीन को चुनौती देना जारी रखती हैं, और यहां तक कि चीन की समुद्री संप्रभुता को छीनने और ताइवान को चीन से अलग करने का प्रयास भी करती हैं। जापानी आक्रमण के खिलाफ युद्ध की जीत की 80वीं वर्षगांठ के लिए सैन्य परेड और स्मारक गतिविधियों का उद्देश्य दुनिया को यह दिखाना है कि चीन कभी भी किसी भी ताकत को चीन के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने या चीन की संप्रभुता का उल्लंघन करने की अनुमति नहीं देगा और चीन अपनी मजबूत शक्ति के साथ किसी भी चुनौती का जवाब देगा। अंतर्राष्ट्रीय फासीवाद-विरोधी युद्ध की जीत के बाद स्थापित संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधित्व वाली अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था विश्व शांति की गारंटी है और किसी को भी इसे बदलने की अनुमति नहीं है।

(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग)

खबरें और भी हैं...

Copyright © 2025 Dainik Savera Times. All rights reserved.
ऐप खोलें