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‘बंगाली मुस्लिमों को बंदूक की नोक पर बांग्लादेश भेजा जा रहा’, ओवैसी का सरकार पर हमला

July 26, 2025

‘बंगाली मुस्लिमों को बंदूक की नोक पर बांग्लादेश भेजा जा रहा’, ओवैसी का सरकार पर हमला

नेशनल डेस्क: AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने बंगाली भाषी मुस्लिमों की गिरफ्तारी को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि सरकार गरीब मुसलमानों को “अवैध बांग्लादेशी” बताकर परेशान कर रही है, जबकि असली घुसपैठियों पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं होती।

क्या है मामला?

पुणे पुलिस ने 23 जुलाई 2025 को 5 बांग्लादेशी महिलाओं को गिरफ्तार किया। ये महिलाएं 20 से 28 साल की उम्र की हैं। उनके पास कोई वैध दस्तावेज नहीं था। वे फर्जी पहचान पत्रों के सहारे पश्चिम बंगाल की निवासी बनकर पुणे में रह रही थीं। कार्रवाई फरासखाना पुलिस स्टेशन और एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) ने मिलकर की।

ओवैसी का बयान

पुणे की इस कार्रवाई के बाद ओवैसी ने सोशल मीडिया (X) पर प्रतिक्रिया दी और कहा, “बंगाली बोलने वाले गरीब मुसलमानों को बार-बार अवैध बांग्लादेशी करार देकर निशाना बनाया जा रहा है।” उन्होंने कहा, “पुलिस उन्हें अवैध रूप से हिरासत में ले रही है, जबकि उनके पास खुद को बचाने के लिए कोई संसाधन नहीं हैं। सरकार ताकतवर लोगों के सामने झुकती है लेकिन गरीबों पर जुल्म करती है। भारतीय नागरिकों को बंदूक की नोंक पर बांग्लादेश में धकेला जा रहा है, जो कि बेहद खतरनाक और असंवैधानिक है।”

ओवैसी ने क्या सबूत दिए

ओवैसी ने अपने पोस्ट में एक आधिकारिक आदेश की तस्वीर भी साझा की, जिसमें लिखा है कि राज्य सरकार ने बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों को वापस भेजने के लिए एक एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) लागू की है। ओवैसी ने कहा, “सिर्फ भाषा बोलने के आधार पर किसी को हिरासत में लेना गैरकानूनी है।”

ओवैसी की चिंता किस बात को लेकर है?

गरीब मुसलमान, खासतौर पर जो झुग्गियों में रहते हैं या घरेलू काम करते हैं, पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ आवाज़ नहीं उठा सकते। उनके पास कानूनी मदद लेने का न तो पैसा है, न पहुंच। बार-बार भाषा या पहनावे के आधार पर उन्हें अवैध घुसपैठिया करार देकर परेशान किया जाता है। ओवैसी ने सरकार पर आरोप लगाया है कि वह मजदूर और गरीब मुसलमानों को निशाना बना रही है, जबकि कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया जा रहा। पुणे में हुई कार्रवाई के बाद यह विवाद और भी बढ़ गया है, और अब इस मामले को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो सकती है।

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