नई दिल्ली: संसद का मानसून सत्र अपने निर्णायक दौर में पहुंच चुका है। जहां एक ओर राज्यसभा में आज ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर चर्चा का अंतिम चरण है, वहीं दूसरी ओर धर्मांतरण के मुद्दे पर संसद परिसर में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है वहीं राज्यसभा में कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया, जिसके बाद सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी गई थी।
राज्यसभा में ऑपरेशन सिन्दूर पर चर्चा के दौरान विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा, “…मैं उनको कहना चाहता हूं, वो कान खोलकर सुन ले। 22 अप्रैल से 16 जून तक, एक भी फोन राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के बीच में नहीं हुआ।”
#WATCH राज्यसभा में ऑपरेशन सिन्दूर पर चर्चा के दौरान विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा, “…मैं उनको कहना चाहता हूं, वो कान खोलकर सुन ले। 22 अप्रैल से 16 जून तक, एक भी फोन राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के बीच में नहीं हुआ।” pic.twitter.com/5pF9coCEot
— ANI_HindiNews (@AHindinews) July 30, 2025
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने राज्यसभा में बोलते हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत सरकार की सख्त प्रतिक्रिया का खुलासा किया। इसके तहत कई राजनयिकों को वापस भेजा गया और पाकिस्तानी नागरिकों को वापस भेजा गया। सबसे अहम जो कदम उठाया गया, वो था सिंधु जल समझौते को स्थगित करना।
#WATCH राज्यसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान, विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा, “सिंधु जल संधि कई मायनों में एक अनूठा समझौता है। मैं दुनिया में ऐसे किसी भी समझौते के बारे में नहीं सोच सकता जहां किसी देश ने अपनी प्रमुख नदियों को उस नदी पर अधिकार के बिना दूसरे देश में बहने… pic.twitter.com/MhykCHEpQf
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राज्यसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान, विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा, “सिंधु जल संधि कई मायनों में एक अनूठा समझौता है। मैं दुनिया में ऐसे किसी भी समझौते के बारे में नहीं सोच सकता जहां किसी देश ने अपनी प्रमुख नदियों को उस नदी पर अधिकार के बिना दूसरे देश में बहने दिया हो। इसलिए यह एक असाधारण समझौता था और, जब हमने इसे स्थगित कर दिया है, तो इस घटना के इतिहास को याद करना महत्वपूर्ण है। कल मैंने लोगों को सुना, कुछ लोग इतिहास से असहज हैं। वे चाहते हैं कि ऐतिहासिक चीजों को भुला दिया जाए। शायद यह उन्हें शोभा नहीं देता, वे केवल कुछ चीजों को याद रखना पसंद करते हैं…”
कांग्रेस और वाम दलों के नेताओं ने छत्तीसगढ़ में दो ननों की गिरफ्तारी के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया।
#WATCH दिल्ली: बिहार में SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) मुद्दे के खिलाफ विपक्ष ने संसद के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। pic.twitter.com/nZbTXjHJl8
— ANI_HindiNews (@AHindinews) July 30, 2025
बिहार में SIR मुद्दे के खिलाफ विरोध प्रदर्शन
बिहार में SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) मुद्दे के खिलाफ विपक्ष ने संसद के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने बिहार में मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण की मांग को लेकर ‘सस्पेंशन ऑफ बिजनेस’ नोटिस दाखिल किया है। वहीं, कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने दिल्ली में जारी अतिक्रमण विरोधी अभियान पर लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव पेश किया है।
#WATCH | Delhi | Congress MPs, including Priyanka Vadra, Hibi Eden, KC Venugopal and others, protest outside the Parliament against the BJP government over the arrest of two Kerala nuns in Chhattisgarh on charges of trafficking and religious conversion pic.twitter.com/kRDACujEti
— ANI (@ANI) July 30, 2025
धर्मांतरण को लेकर संसद परिसर में हंगामा
छत्तीसगढ़ में कथित धर्मांतरण के आरोप में गिरफ्तार की गईं केरल की दो ननों को लेकर सियासी तूफान खड़ा हो गया है। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा की अगुवाई में पार्टी के कई सांसदों ने संसद परिसर में शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। सीपीआईएम के वरिष्ठ नेताओं ने दुर्ग केंद्रीय कारागार में बंद ननों से मुलाकात कर समर्थन जताया। विपक्ष का आरोप है कि यह गिरफ्तारियां धार्मिक स्वतंत्रता पर सीधा हमला हैं।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर राज्यसभा में अंतिम बहस
‘ऑपरेशन सिंदूर’, जिसे सरकार ने भारतीय नागरिकों को विदेशी धरती से सुरक्षित निकालने के एक प्रमुख अभियान के रूप में प्रस्तुत किया है, आज राज्यसभा में बहस के अंतिम चरण में पहुंचा। इस अभियान की समीक्षा के तहत विदेश मंत्री एस. जयशंकर दोपहर 1 बजे सदन को संबोधित करेंगे। इसके बाद दोपहर 3 बजे केंद्रीय मंत्री और सदन में नेता जेपी नड्डा अपने विचार प्रकट करेंगे। वहीं, गृह मंत्री अमित शाह से उम्मीद की जा रही है कि वे चर्चा का समापन कर सरकार का रुख स्पष्ट करेंगे।
राजनीतिक संदेशों से भरपूर सत्र
संसद का यह मानसून सत्र न सिर्फ नीति और सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण मसलों को उठा रहा है, बल्कि यह सत्र सरकार और विपक्ष के बीच वैचारिक संघर्ष का भी मंच बन गया है। धर्म, नागरिक सुरक्षा, और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से जुड़े विषयों ने सत्र को विशेष रूप से संवेदनशील और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बना दिया है।
अब देखना यह होगा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और धर्मांतरण जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सरकार विपक्ष की चिंताओं को कैसे संबोधित करती है, और क्या संसद से कोई ठोस नीति संकेत निकलता है।