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चीन की अर्थव्यवस्था 2025: अवसर, चुनौतियाँ और वैश्विक प्रभाव

August 3, 2025

चीन की अर्थव्यवस्था 2025: अवसर, चुनौतियाँ और वैश्विक प्रभाव

साल 1978, जब से चीन ने अपनी अर्थव्यवस्था को ऊपर उठाने के लिए अमूल-चूल परिवर्तन करने शुरू किए और दुनिया भर के लिए अपने दरवाजे खोल दिए, तब से लेकर अब तक सकल घरेलू उत्पाद की औसत दर लगभग 9% प्रति वर्ष से ज्यादा  रही है जबकि लगभग 80 करोड़ से ज्यादा लोग गरीबी से बाहर निकले। 

जिसने चीन को 4.99 खरब डॉलर के संज्ञात्मक सकल घरेलू उत्पाद (Gross Domestic Knowledge Product – GDKP) के साथ अमेरिका और जापान के बाद विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना दिया,  जबकि  क्रय शक्ति के आधार पर चीन 8.77 खरब डॉलर के साथ अमेरिकी अर्थव्यवस्था के बाद विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। 

हाल के वर्षों की वैश्विक आर्थिक अस्थिरता, महामारी, भू-राजनीतिक तनावों और व्यापारिक टकरावों के बावजूद, चीन की स्थिर अर्थव्यवस्था और निरंतर प्रगति इसे वैश्विक पटल पर और भी ज्यादा महत्वपूर्ण और भरोसेमंद बनाती है।

वर्तमान स्थिति

विकास दर

राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो (एनबीएस) के आंकड़े देखे जाए तो चीन की अर्थव्यवस्था ने साल की शुरूआत शानदार ढंग से की है। 2025 की पहली छमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 66.05 ट्रिलियन युआन (लगभग 9.24 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर) तक पहुँच गया। जिससे जीडीपी में 5.2% की दर से वृद्धि दर्ज देखी जा सकती है। वहीं पहली तिमाही ने पिछली तिमाही के मुकाबले 1.2 % की वृद्धि दर्ज की है। GDP में दर्ज की गई ये वृद्धि अंतरराष्ट्रीय अर्थशास्त्रियों के अनुमान से कहीं अधिक है। 

 जनवरी से जून तक की अवधि में, चीन का कुल वस्तु व्यापार मूल्य 2.9 प्रतिशत की दर से बढ़कर 21.79 ट्रिलियन युआन  हो गया। जिसमें कुल निर्यात 13 ट्रिलियन आरएमबी जबकि आयात 8.79 ट्रिलियन युआन रहा। हालांकि जून में हुई इस ग्रोथ ने भविष्य में संभावित सुधारों की तरफ संकेत दिया है।

उत्पादन

विनिर्माण क्षेत्र, विशेष रूप से हाई-टेक और उपकरण-संबंधी उद्योगों में मज़बूत विस्तार के चलते चीन के औद्योगिक क्षेत्र ने 2025 की पहली छमाही में स्थिर वृद्धि जारी रखी। जहां विनिर्माण उत्पादन विकास का प्रमुख चालक बना रहा जहां  7.0 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, वहीं खनन उत्पादन में 6.0 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। बिजली, ताप विद्युत, गैस और जल उत्पादन एवं आपूर्ति में  पिछले साल की तुलना में 1.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई।

अकेले जून माह में औद्योगिक उत्पादन में पिछले साल की तुलना में 6.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई जो वर्ष की दूसरी छमाही में मामूली तेजी का संकेत है। 

घरेलू खपत 

2025 की पहली छमाही में चीन की उपभोक्ता वस्तुओं की खुदरा बिक्री कुल 24.55 ट्रिलियन युआन तक पहुँच गई, जो पिछले साल के मुकाबले शहरी क्षेत्रों में 5.0 % की जबकि ग्रामीण इलाकों में 4.9 % की बढ़ोतरी दिखाती है । खासकर घरेलू उपकरण, संचार उपकरण, फर्नीचर आदि की बिक्री में 22–31 % तक की तेज़ी देखी गई। अगर ऑनलाइन खुदरा बिक्री की बात की जाए तो वो 7.43 ट्रिलियन युआन रही  जिसमें वस्तुओं की बिक्री 6.12 ट्रिलियन युआन हुई है। 

पिछली बार आई मंदी के बाद से ही सरकार ने घरेलू उत्पादन के खपत को बढ़ावा देने के लिए कई नीतियां लागू की और नई योजानाओं को बढ़ावा दिया।  सरकार के इन प्रयासों से सकल घरेलू उत्पाद में उपभोग की हिस्सेदारी  40% पर भी ऊपर पहुंच चुकी है। 

विदेशी व्यापार 

चीन की विदेशी व्यापार क्षमता साल 2025 के फर्स्ट हॉफ  में उल्लेखनीय रही। अमेरिकी बाजार के दबाव के बावजूद, निर्यात में लगातार बढ़ोतरी हुई है और व्यापार घाटा भी सुधर रहा है। सरकार की बिजनेस डाइवर्सीफिकेशन (Business Diversification) की रणनीति के चलते और साथ ही अमेरिका–चीन 90-दिवसीय शांति समझौते ने निर्यात को अच्छा-खासा बढ़ावा दिया है।

जनवरी से जून तक की अवधि में चीन का कुल व्यापार 21.79 ट्रिलियन युआन (3.04 ट्रिलियन डॉलर) रहा,  जिसमें कि कुल निर्यात 13 ट्रिलियन युआन (+7.2 %) और आयात 8.79 ट्रिलियन युआन (−2.7 %) रहा । 

निष्कर्ष :

वैश्विक चुनौतियों के बीच भी वर्ष 2025 की पहली छमाही में चीन की अर्थव्यवस्था स्थिर रही। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) में जून 2025 में +0.1% की सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई, जो डिफ्लेशन से उबरने की दिशा में संकेत है। साथ ही, मुद्रा आपूर्ति (M1/M2) में वृद्धि और मौद्रिक नीति में नरमी ने बाजार में लिक्विड फ्लो को बनाए रखा। चीन की “Made in China 2025 (MIC 2025)” की पहल ने तकनीकी आत्मनिर्भरता को गति दी है, जिससे देश ग्लोबल कंपटीशन में आगे बढ़ रहा है।

वैश्विक परिदृश्य में चीन की अर्थव्यवस्था न केवल क्षेत्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार एवं आपूर्ति श्रृंखला की स्थिरता में एक निर्णायक स्तंभ बन चुकी है। यदि वर्तमान नीतिगत प्रयास जारी रहते हैं और संरचनात्मक सुधारों को सशक्त रूप से लागू किया जाता है, तो चीन आने वाले वर्षों में सतत, इनोवेटिव और समावेशी विकास का आदर्श बन सकता है।

(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग) (लेखक— पवन कुमार पान्डेय)

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