नेशनल डेस्क: जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने को छह साल पूरे हो चुके हैं और इस दौरान केंद्रशासित प्रदेश ने शासन, लोकतंत्र और आर्थिक विकास के क्षेत्रों में व्यापक बदलाव देखे हैं। राजनीतिक बहसें भले ही राज्य का दर्जा बहाल करने को लेकर चलती रही हों, लेकिन जमीनी हकीकत यह दर्शाती है कि क्षेत्र अब तेज़ी से एक नए युग की ओर बढ़ रहा है।
उमर अब्दुल्ला ने कहा
मैंने कल जम्मू-कश्मीर में क्या होने वाला है, इस बारे में हर संभव संभावना और संयोजन सुन लिया है, इसलिए मैं पूरी ईमानदारी से कहूँगा कि कल कुछ नहीं होगा – सौभाग्य से कुछ बुरा नहीं होगा, लेकिन दुर्भाग्य से कुछ सकारात्मक भी नहीं होगा। मैं अभी भी संसद के इस मानसून सत्र में जम्मू-कश्मीर के लिए कुछ सकारात्मक होने को लेकर आशावादी हूँ, लेकिन कल नहीं। और नहीं, मैंने दिल्ली में लोगों से कोई मुलाकात या बातचीत नहीं की है। यह बस एक आंतरिक भावना है। देखते हैं कल क्या होता है।
I’ve heard every possible permutation & combination about what to expect in J&K tomorrow so let me stick my neck out and say nothing will happen tomorrow – fortunately nothing bad will happen but unfortunately nothing positive will happen either. I’m still optimistic about…
— Omar Abdullah (@OmarAbdullah) August 4, 2025
लोकतंत्र की जड़ें हुईं मजबूत
केंद्र सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के बाद, जम्मू-कश्मीर में लोकतांत्रिक प्रक्रिया ने अभूतपूर्व गति पकड़ी है। वर्ष 2020 में पहली बार ज़िला विकास परिषद (डीडीसी) के चुनाव कराए गए, जिससे स्थानीय स्तर पर सत्ता का विकेंद्रीकरण संभव हुआ। 2024 के विधानसभा चुनावों में रिकॉर्ड मतदान और युवाओं व महिलाओं की बढ़ती भागीदारी ने स्पष्ट किया कि कश्मीर अब राजनीतिक रूप से अधिक सजग और सक्रिय होता जा रहा है।
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की “इंसानियत, जम्हूरियत और कश्मीरियत” की भावना को फिर से जीवंत करते हुए, ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोकतंत्र की पकड़ मजबूत हुई है, जहां पंचायत चुनावों में 70% तक मतदान हुआ।
शिक्षा और स्वास्थ्य में उल्लेखनीय प्रगति
पिछले छह वर्षों में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में भी बड़े सुधार देखने को मिले हैं। जम्मू में आईआईटी की स्थापना और रियासी में नए मेडिकल कॉलेज का उद्घाटन क्षेत्रीय शिक्षा की गुणवत्ता को नई ऊंचाई पर ले जा रहा है। विजयपुर में एम्स कार्यरत है और अवंतीपोरा एम्स 2025 के अंत तक शुरू होने की उम्मीद है।
इन प्रयासों से न केवल स्थानीय लोगों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं, बल्कि मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं को भी नए अवसर मिल रहे हैं।
आर्थिक विकास और निवेश का नया दौर
2019 के बाद से जम्मू-कश्मीर में 80,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित हुआ है, जिसमें रोजगार सृजन और उद्यमिता को बढ़ावा देने वाली योजनाएं शामिल हैं। स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रमों से महिलाओं और युवाओं को विशेष लाभ मिला है।
रेल, सड़क और सुरंग परियोजनाओं के जरिए बुनियादी ढांचे को भी मजबूत किया गया है। उधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल लिंक पूरी तरह से चालू हो चुका है, जो घाटी को शेष भारत से जोड़ता है। ज़ोजि-ला, ज़ेड मोड़ और बनिहाल-काज़ीगुंड सुरंग जैसी परियोजनाएं भी रणनीतिक और आर्थिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।
डिजिटल और पर्यटन क्षेत्र में उछाल
डिजिटल इंडिया के तहत भारतनेट योजना के माध्यम से मार्च 2025 तक लगभग 9789 फाइबर-टू-होम कनेक्शन सक्रिय किए गए हैं, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों में इंटरनेट की पहुंच बेहतर हुई है। इसके अलावा, श्रीनगर को यूनेस्को द्वारा “विश्व शिल्प नगरी” का दर्जा मिलना भी एक बड़ी उपलब्धि है।
पर्यटन में भी तेजी से वृद्धि हुई है। श्रीनगर के लिए उड़ानों की संख्या 2019 की 35 से बढ़कर 2024 में 125 हो गई है। इको-टूरिज्म, हेरिटेज होमस्टे और स्थानीय कारीगरों द्वारा संचालित पर्यटन अनुभव, न केवल पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे रहे हैं।