वाशिंगटन : पिछले कई दशकों तक अमरीका और सोवियत संघ (अब रूस) के बीच परमाणु संघर्ष की आशंका रही और क्यूबा मिसाइल संकट जैसे कुछ मौकों पर यह तनाव खतरनाक स्तर तक पहुंच गया। अमरीकी और सोवियत नेताओं ने 1970 के दशक से तनाव कम करने की दिशा में कदम उठाए, जिनके चलते कई अहम समझौते हुए। इनमें वर्ष 1987 की मध्यम दूरी के परमाणु बल (आईएनएफ) संधि भी शामिल है, जिसके तहत परमाणु क्षमता वाली मिसाइलों की एक पूरी श्रेणी को ही समाप्त कर दिया गया था।
यह संधि वर्ष 2019 में समाप्त हो गई जब अमरिका ने इससे बाहर होने का निर्णय लिया। अब मंगलवार को रूस ने भी इस संधि के तहत अपने ऊपर लगाए गए स्वैच्छिक प्रतिबंधों को समाप्त करने की घोषणा कर दी। अब अमरीका और रूस के बीच केवल एक परमाणु हथियार नियंत्रण समझौता ‘न्यू स्टार्ट’ ही बचा है, जिसे विशेषज्ञ संकटग्रस्त मान रहे हैं और
जो फरवरी 2026 में स्वतः समाप्त होने वाला है। परमाणु हथियार नियंत्रण मामलों के विशेषज्ञ अलैक्जैंडर बॉलफ्रास, ने कहा, ‘जरूरी नहीं कि अमरीका और रूस के बीच परमाणु समझौतों का अंत परमाणु युद्ध की संभावना को बढ़ा दे, लेकिन यह निश्चित रूप से इसे कम भी नहीं करता । ‘ बॉलफ्रास अंतर्राष्ट्रीय रणनीतिक अध्ययन संस्थान से जुड़े हैं। बुधवार को जब अमरीका द्वारा जापानी शहर हिरोशिमा पर परमाणु बम गिराए जाने की 80वीं बरसी मनाई गई, तब उस त्रासदी में जीवित बचे लोगों ने विश्व नेताओं द्वारा परमाणु हथियारों को निवारक शक्ति के रूप में समर्थन दिए जाने पर निराशा और चिंता व्यक्त की।
मेष: दिन शुभ रहेगा...