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Rakshabandhan 2025: क्या सावन पूर्णिमा पर लगेगा भद्रा का साया? जानें शुभ मुहूर्त और सावधानियां!

August 8, 2025

Rakshabandhan 2025: क्या सावन पूर्णिमा पर लगेगा भद्रा का साया? जानें शुभ मुहूर्त और सावधानियां!

नई दिल्ली: रक्षाबंधन भाई-बहन के अटूट प्रेम और सुरक्षा के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है, इस साल 9 अगस्त, यानी कल बड़े धूमधाम से मनाया जाएगा। यह पर्व श्रावण मास की पूर्णिमा को आता है और पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ भाई-बहन के बीच प्यार और सौहार्द्र को मजबूत करता है। खास बात यह है कि ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस बार रक्षाबंधन के दिन भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा, जो पिछले चार सालों में पहली बार हो रहा है। इसका मतलब यह है कि राखी बांधने के लिए यह वर्ष अत्यंत शुभ माना गया है।

भद्रा का साया नहीं, शुभता बरसेगी चारों ओर

भद्रा ज्योतिष में एक अशुभ काल माना जाता है, जो किसी भी शुभ कार्य को प्रभावित कर सकता है। लेकिन इस साल रक्षाबंधन के दिन भद्रा का साया नहीं रहेगा, जिससे राखी के त्योहार की शुभता और भी बढ़ जाएगी। यह संयोग चार साल बाद आया है, जो भाई-बहन के रिश्ते में विशेष सकारात्मक ऊर्जा लेकर आएगा।

राखी बांधने का शुभ मुहूर्त

राखी बांधने का समय पूरी तरह से महत्वपूर्ण होता है क्योंकि यह भाई-बहन के रिश्ते को और भी मजबूत बनाने वाला माना जाता है। इस बार राखी बांधने का श्रेष्ठ समय है 9 अगस्त दोपहर 1:24 बजे से पहले। पूर्णिमा की कृपा बनी रहे, इसलिए इस समय तक राखी बांधना अत्यंत शुभ माना गया है। हालांकि रक्षाबंधन का त्योहार सुबह से लेकर रात तक मनाया जा सकता है, लेकिन ज्योतिषियों की सलाह है कि पूर्णिमा के दौरान ही राखी बांधने से शुभ प्रभाव अधिक मिलता है।

राहु काल और रंगों पर कोई रोक नहीं

ज्योतिषाचार्य शैलेंद्र पांडेय के अनुसार, इस साल राहु काल में राखी बांधने पर कोई विशेष पाबंदी नहीं है। आप चाहें तो राहु काल के दौरान भी राखी बंधवा सकते हैं और लाल रंग की राखी भी पहन सकते हैं। यह परंपरा बिना किसी रोक-टोक के पूरे आनंद के साथ मनाई जा सकती है। इसलिए इस बार रक्षाबंधन पर कोई भी संकोच नहीं, पूरे दिल से त्योहार मनाएं।

रक्षाबंधन की तिथि और समय

पूर्णिमा तिथि आरंभ: 8 अगस्त दोपहर 2:12 बजे से

पूर्णिमा तिथि समाप्ति: 9 अगस्त दोपहर 1:24 बजे तक

इस दौरान राखी बांधने से धार्मिक और आध्यात्मिक लाभ मिलता है।

रक्षाबंधन की पूजा कैसे करें

रक्षाबंधन का पर्व पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाना चाहिए। पूजा की थाली में भगवान को समर्पित कर, भाई को पूर्व या उत्तर की दिशा में बैठाएं। उसके बाद भाई के माथे पर तिलक लगाएं, रक्षासूत्र बांधें और आरती करें। राखी बांधने के बाद मिठाई खिलाएं और भाई की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करें। ध्यान रखें कि भाई का सिर खुला हो और राखी बंधवाने के बाद माता-पिता का आशीर्वाद लेना न भूलें।

इस बार का रक्षाबंधन अपने साथ खुशियों और सौभाग्य का संदेश लेकर आ रहा है। भद्रा न होने और राहु काल की चिंता मुक्त माहौल में, यह पर्व भाई-बहन के प्रेम को और गहरा करेगा। आप भी इस रक्षाबंधन पर अपने रिश्तों को नए रंगों से सजाएं और भाइयों की रक्षा का वचन दिल से निभाएं।

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