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दुनिया से मुकाबले के लिए मोदी का लाल किले से आत्मनिर्भरता, स्वदेशी और एकजुटता का आह्वान

August 16, 2025

दुनिया से मुकाबले के लिए मोदी का लाल किले से आत्मनिर्भरता, स्वदेशी और एकजुटता का आह्वान

नयी दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विश्व में बढते संरक्षणवाद के बीच विकसित और वैश्विक रूप से हर क्षेत्र में प्रतिस्पर्धी भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए आत्मनिर्भरता और स्वदेशी को मूल मंत्र बताते हुए राजनीतिक दलों और सभी देशवासियों से इसके लिए अपनी पूरी शक्ति लगाने का पुरजोर आह्वान किया है। श्री मोदी ने भारत के खिलाफ व्यापार के क्षेत्र में बढ रहे दबावों के बीच कहा कि विकसित भारत के लिए आत्मनिर्भरता अनिवार्य शर्त है।

उन्होंने कहा कि भारत अपने किसानों तथा कमजोर वर्गों के हितों के साथ कोई समझौता नहीं करेगा और स्वदेशी को अपनी मजबूती के लिए अपनाकर दूसरों को मजबूर करेगा। प्रधानमंत्री ने शुक्रवार को यहां 79 वें स्वतंत्रता दिवस पर ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से 12 वीं बार राष्ट्र को संबोधित करते हुए अपने अब तक के सबसे लंबे भाषण में देश के समक्ष चुनौतियों , देश की ताकत और देश के भविष्य का खाका प्रस्तुत किया जिसमें रक्षा और सुरक्षा से लेकर आर्थिक , सामाजिक और तकनीकी क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर जोर दिया गया है।

उन्होंने इसी संदर्भ में नयी योजनाओं और पहलों की घोषणा की जिसमें युवाओं के लिए रोजगार योजना, सैन्य और असैन्य प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए मिशन सुदर्शन चक्र, अवैध घुसपैठियों से निपटने के लिए उच्च अधिकार प्राप्त मिशन, जीएसटी में नयी पीढी के सुधार, देश को दस लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए सुधारों पर कार्य बल के गठन , लड़ाकू विमानों के लिए स्वदेशी इंजन के विकास , परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता में विस्तार और खनिज तेल तथा गैस के लिए गहरे समुद्र में अन्वेषण के लिए समुद्र मंथन जैसी कई घोषणाएं शामिल हैं।

उन्होंने सेमिकंडक्टर मिशन की सफलता का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत में इसी वर्ष माइक्रोचिप का विनिर्माण शुरू हो जायेगा। उन्होंने अंतरिक्ष में भारत की ऊंची उडान का जिक्र किया और कहा कि देश गगनयान मिशन की अपने बल पर सफलता तथा अपना अंतरिक्ष स्टेशन बनाने की दिशा में काम कर रहा है। श्री मोदी ने पाकिस्तान को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि भारत अब परमाणु धमकी में आने वाला नहीं है और आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई के लिए सेनाओं को खुली छूट दी गयी है। सिंधु जल संधि को अन्यायपूर्ण बताते हुए प्रधानमंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि भारत इसे मौजूदा स्वरूप में स्वीकार नहीं करेगा।

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