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भारत-चीन रिश्तों में नई शुरुआत के संकेत

August 27, 2025

भारत-चीन रिश्तों में नई शुरुआत के संकेत

इंटरनेशनल डेस्क: हाल के सालों में भारत और चीन के रिश्तों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिले। लेकिन 18-19 अगस्त, 2025 को चीन के विदेश मंत्री वांग यी की भारत यात्रा ने इन रिश्तों को सुधारने की दिशा में एक बड़ा मोड़ दिया है। ये दौरा ऐसे वक्त पर हुआ जब दोनों देशों के बीच सीमा विवाद और आर्थिक मतभेद अभी भी बड़ी चुनौतियां बने हुए थे।

वांग यी ने दिल्ली आकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और उन्हें चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग की तरफ से शांगहाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में शामिल होने का औपचारिक न्योता दिया। यह शिखर सम्मेलन 31 अगस्त से 1 सितंबर तक चीन के उत्तरी शहर थ्येनचिन में होने वाला है। चीन मोदी का इसमें हिस्सा लेने का स्वागत करता है ।

इस मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने फिर से जोर दिया कि सीमा पर शांति और स्थिरता बेहद जरूरी है। ये बात इसलिए और अहम है क्योंकि 2020 की गलवान घाटी झड़प के बाद से रिश्तों में काफी खटास आई थी। मोदी ने ये भी संकेत दिया कि वे SCO समिट में राष्ट्रपति शी चिनफिंग से मुलाकात करना चाहेंगे।

अगर ऐसा होता है तो ये दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत करने का एक बड़ा मौका साबित हो सकता है। सच कहें तो वांग यी का यह दौरा केवल बातचीत का नया रास्ता खोलने वाला ही नहीं रहा, बल्कि इससे दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की प्रक्रिया भी तेज हुई है।
कूटनीतिक कोशिशों के साथ-साथ आर्थिक क्षेत्र में अहम सहमति भी बनी है।दोनों पक्ष ठोस कदम उठाकर दोनों देशों के बीच आर्थिक व व्यापारिक सहयोग और निवेश के लिए सुविधाएं प्रदान करने पर सहमत हुए हैं ।

इसके अलावा, 2020 से बंद पड़ा सीमा व्यापार भी लिपुलेख दर्रा, शिपकिला और नाथूला जैसे रास्तों से फिर से शुरू करने की तैयारी चल रही है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को फायदा होगा और दोनों देशों के बीच ट्रेड पर भरोसा बढ़ेगा। एक और अच्छी खबर ये है कि भारत और चीन ने 2020 से बंद पड़ी सीधी फ्लाइट्स को दोबारा शुरू करने का वादा किया है। इससे टूरिज्म और बिज़नेस दोनों को नई जान मिलेगी। एयर इंडिया और इंडिगो जैसी एयरलाइंस सितंबर से चीन के लिए उड़ानें शुरू करने की तैयारी कर रही हैं।

भारत के लिए चीन के साथ रिश्ते बेहतर करने के कई स्ट्रेटेजिक और आर्थिक फायदे हैं। कोविड-19 और हाल की भू-राजनीतिक उथल-पुथल ने ग्लोबल सप्लाई चेन को हिला कर रख दिया है। ऐसे समय में चीन, जो दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी है, के साथ सहयोग भारत के लिए बेहद फायदेमंद हो सकता है। खासकर दुर्लभ पृथ्वी जैसे रणनीतिक संसाधनों के मामले में यह साझेदारी भारत को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में मजबूती देगी और अमेरिका या ऑस्ट्रेलिया जैसी जगहों पर उसकी निर्भरता कम होगी।

इसके अलावा, चीन के साथ नजदीकी भारत को पश्चिमी बाज़ारों पर अत्यधिक निर्भरता से भी राहत देगी। हाल के सालों में अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर और भारत-अमेरिका रिश्तों में आई हलचल ने भारत को नए पार्टनर्स तलाशने पर मजबूर किया है। ऐसे में चीन के साथ अच्छे रिश्ते भारत के लिए बैलेंस बनाने में मददगार होंगे और निर्यात बाज़ारों में भी नई विविधता लाएंगे। ये सुधार भारत की क्षेत्रीय संगठनों में भूमिका को भी मजबूत करते हैं, जैसे SCO और BRICS। SCO में सक्रिय रोल निभाकर भारत आतंकवाद विरोध, क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक सहयोग पर अपनी आवाज़ और बुलंद कर सकता है। वहीं, BRICS में चीन जैसे बड़े सदस्य के साथ तालमेल बढ़ाकर भारत विकासशील देशों की नीतियों को बेहतर दिशा देने में और असरदार हो सकेगा।

देखा जाए तो वांग यी की भारत यात्रा और इसके साथ जुड़े फ़ैसले दोनों देशों के बीच रिश्तों में एक नई शुरुआत का संकेत दे रहे हैं। हां, सीमा विवाद अभी पूरी तरह हल नहीं हुए हैं, लेकिन इन प्रगति भरे कदमों से उम्मीद जरूर जगती है कि आने वाले वक्त में भारत और चीन न सिर्फ अपने रिश्ते सुधारेंगे बल्कि एशिया में शांति और स्थिरता लाने में भी अहम योगदान देंगे।

(अखिल पाराशर, चाइना मीडिया ग्रुप, बीजिंग)

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