टोक्यो: जापान की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। बता दें कि प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा ने अपने पद से इस्तीफा देने का फैसला किया है। जापान के प्रमुख सार्वजनिक प्रसारक एनएचके की रिपोर्ट के अनुसार, इशिबा ने यह कदम ऐसे समय उठाया है जब उन पर पार्टी के भीतर से ही तीखा दबाव बनाया जा रहा था।
इशिबा, जिन्होंने अक्टूबर 2024 में प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी, लगातार चुनौतियों से जूझते रहे हैं। जुलाई में हुए उच्च सदन के चुनाव में एलडीपी (लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी) को मिली करारी हार ने उनकी स्थिति को और कमजोर कर दिया। इस चुनावी असफलता के बाद पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन की मांग तेज़ हो गई थी।
क्यों देना पड़ रहा है इस्तीफा?
प्रधानमंत्री के रूप में कार्यकाल की शुरुआत में इशिबा ने महंगाई पर नियंत्रण, राजनीतिक पारदर्शिता और पार्टी सुधार जैसे बड़े वादे किए थे। लेकिन सत्ता में आने के कुछ ही महीनों में उनकी सरकार राजनीतिक चंदा घोटालों और आंतरिक कलह का शिकार बन गई।
एलडीपी और इसके सहयोगी दल कोमेइतो, दोनों ने निचले सदन में पहले ही बहुमत खो दिया था और इसके बाद उच्च सदन में भी स्थिति नहीं संभल पाई। पार्टी के अंदरूनी सर्वे और जनमत संग्रहों से संकेत मिले कि नेतृत्व में बदलाव जरूरी हो गया है। इसी माहौल में इशिबा ने खुद को पीछे हटाने का फैसला किया।
शिगेरु इशिबा का राजनीतिक सफर
68 वर्षीय शिगेरु इशिबा जापान के एक प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार से आते हैं। उन्होंने 1986 में मात्र 29 वर्ष की उम्र में प्रतिनिधि सभा का चुनाव जीता था। उनके राजनीतिक करियर में वह रक्षा मंत्री (2007-08), कृषि मंत्री (2008-09) और एलडीपी महासचिव (2012-14) जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं।
उनके पिता भी जापानी राजनीति में एक बड़ा नाम थे उन्होंने तोतोरी प्रांत के गवर्नर और गृह मंत्री के तौर पर अपनी सेवाएं दी थीं। पिता की मृत्यु के बाद राजनीति में कदम रखने वाले इशिबा ने 2024 में देश के प्रधानमंत्री बनने तक का सफर तय किया।
पार्टी नेतृत्व में जल्द होगा बदलाव
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सोमवार को एलडीपी में नए नेता के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। पार्टी के 342 सांसदों और क्षेत्रीय प्रतिनिधियों में से 149 ने नेतृत्व परिवर्तन का समर्थन किया है, जबकि कुछ सदस्य अभी भी बदलाव के पक्ष में नहीं हैं।