
नई दिल्ली: अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) ने आईआईटी मद्रास, आईआईएएम मुंबई और एक्स्ट्रा-सी के सहयोग से नेशनल इंटर-कॉलेज क्रॉसवर्ड एक्पीडिशन (एनआईसीई -2025) के ग्रैंड फिनाले का आयोजन किया। कड़ी प्रतियोगिता के बाद, आईआईटी दिल्ली की प्रनिका और सीरत कौर नाइस-2025 ट्रॉफी जीतकर विजेता बनीं। प्रथम उपविजेता आईआईटी गुवाहाटी के चिन्मय और रुचिरा रहे, जबकि सस्त्रा विश्वविद्यालय के यशस्वी और अनन्या द्वितीय उपविजेता रहे। आईआईटी दिल्ली ने लगातार चौथी बार यह खिताब जीता है।
उच्च शिक्षा सचिव (आईएएस) डॉ. विनीत जोशी ने विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए। उन्होंने विजेताओं और प्रतिभागियों की प्रशंसा करते हुए ऐसी पहलों के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि क्रॉसवर्ड एक गतिशील मानसिक व्यायाम है जो लेटरल थिंकिंग, स्मरण क्षमता, टीम वर्क और समस्या-समाधान के कौशल को बढ़ावा देता है। तकनीकी शिक्षा के छात्रों के लिए ये गुण अमूल्य हैं क्योंकि वे भविष्य में नेतृत्व की भूमिकाओं के लिए तैयार होते हैं। हमें उम्मीद है कि जल्द ही यह प्रतियोगिता भारत अनेक संस्थानों तक पहुंचेगी।”
एआईसीटीई के अध्यक्ष प्रो. टी.जी. सीताराम ने इस पहल के शैक्षणिक और सांस्कृतिक मूल्य पर जोर देते हुए कहा कि यह प्रतियोगिता न केवल मानसिक विकास और सॉफ्ट स्किल्स को बढ़ाने में सहायक है बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए भी एक मंच प्रदान करती है। यह कक्षा से परे सीखने को बढ़ावा देकर, स्व-शिक्षण, टीम वर्क और त्वरित निर्णय लेने को प्रोत्साहित करके एनईपी-2020 की भावना को दर्शाती है। ऐसी पहल छात्रों को भारत की परंपराओं से जोड़े रखते हुए उन्हें आजीवन कौशल से सशक्त बनाती हैं।”
समारोह में श्री पंकज मिश्रा, आईआरएस, सदस्य, सीबीडीटी; श्री विवेक कुमार सिंह, अध्यक्ष, रेरा बिहार; प्रो. श्यामा रथ, सदस्य सचिव, एआईसीटीई; श्री बाबू राम, डीआईजी, सीआईएसएफ दिल्ली मेट्रो; श्री शरत कुमार सिन्हा, एसीपी, दिल्ली पुलिस; और एक्स्ट्रा-सी से श्री राज नारायण समेत कई गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया इस दौरान नाइस-2026 का कैलेंडर भी जारी किया गया।
नाइस के बारे में
नाइस की अवधारणा एक नवोन्मेषी ज्ञान-संचालित कार्यक्रम के रूप में की गई थी जो अब एक प्रतिष्ठित वार्षिक प्रतियोगिता के रूप में विकसित हो गया है। शिक्षा को मनोरंजन के साथ जोड़कर, यह क्रिटिकल थिंकिंग को बढ़ावा देता है, समस्या-समाधान क्षमताओं में सुधार करता है। यह भारत की सांस्कृतिक गहराई की सराहना को भी बढ़ावा देता है। एआईसीटीई अपने सहयोगियों के साथ, देश भर में अधिक से अधिक छात्रों को प्रेरित करने के लिए नाइस का आयोजन करता है।