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मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला बोले- Industrial Development युवाओं और कारीगरों के लिए रोजगार और व्यवसाय में तबदील होना चाहिए

September 20, 2025

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला बोले- Industrial Development युवाओं और कारीगरों के लिए रोजगार और व्यवसाय में तबदील होना चाहिए

श्रीनगर : मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah) ने उद्योग एवं वाणिज्य विभाग को जम्मू-कश्मीर के औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए एक सिक्रय और समावेशी दृष्टिकोण अपनाने का निर्देश दिया, जिसमें विशेष ध्यान रोजगार सृजन, स्थिरता और प्रतिस्पर्धा पर दिया जाए। मुख्यमंत्री ने उन एमएसएमई इकाइयों के सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया जो कठिनाई में हैं लेकिन न्यूनतम सरकारी हस्तक्षेप से पुनर्जीवित की जा सकती हैं। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि ऐसी इकाइयों की जल्द पहचान की जाए ताकि वे निष्क्रि य न हों। उन्होंने कहा, ‘अगर समय पर सहयोग मिले तो ये इकाइयाँ पर्याप्त रोजगार उत्पन्न कर सकती हैं।’

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने चालू वित्तीय वर्ष में पूंजीगत व्यय, विशेषकर पीएमईजीपी और आरईजीपी योजनाओं के तहत धीमी प्रगति पर चिंता व्यक्त की और विभाग से कम-से-कम पिछले वर्ष की प्रगति के बराबर प्रदर्शन सुनिश्चित करने को कहा। मुख्यमंत्री ने नई केंद्रीय क्षेत्रीय योजना की भी समीक्षा की जिसका उद्देश्य नए निवेश को प्रोत्साहित करना और उसके तहत प्रदान की जाने वाली प्रोत्साहन राशि है। उन्होंने योजना के अंतर्गत दावे-वार प्रगति का आकलन किया और तय लक्ष्यों को पूरा करने का निर्देश दिया।

हस्तशिल्प के जीआई प्रमाणन के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने जीआई परीक्षण सुविधाओं को बढाने का आह्वान किया ताकि हस्तशिल्प विभाग की सीमति क्षमता के कारण व्यापारी प्रभावित न हों। उन्होंने कहा कि पर्याप्त व्यवस्था के बिना जीआई टैगिंग का उद्देश्य ही विफल हो जाएगा। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा ‘जम्मू-कश्मीर में औद्योगिक विकास केवल निवेश आकर्षित करने तक सीमित नहीं होना चाहिए बल्कि यह सुनिश्चित करे कि यह हमारे युवाओं और कारीगरों के लिए नौकरियाँ, आजीविकाएँ और सतत विकास का कारण बने।’

इससे पहले उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त सचिव विक्र मजीत सिंह ने विभाग की प्रगति पर विस्तार से प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में जम्मू-कश्मीर में हुए निवेश की मात्रा 4145 करोड़ रु पये तक पहुँच गई है, जो 2021 से पहले की औसत का लगभग 10 गुना है, जबकि वर्तमान वित्तीय वर्ष (अगस्त 2025 तक) में ही 4001 करोड़ रु पए की परियोजनाएँ शुरू हो चुकी हैं, जिनसे औपचारिक औद्योगिक क्षेत्र में 5,111 नौकरियाँ पैदा हुई हैं। पहली बार 500 करोड़ रु पए से अधिक निवेश वाली कई इकाइयाँ धातु, प्लास्टिक, औषिध, वस्त्र और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में स्थापित हुई हैं। प्रस्तुति में यह भी बताया गया कि एमएसएमई जम्मू-कश्मीर के जीडीपी में 8 प्रतिशत योगदान देते हैं और 10.88 लाख से अधिक लोगों को रोजगार देते हैं, जिनमें 15 प्रतिषत महिलाएँ शामिल हैं। एमएसएमई हेल्थ क्लिनिक, 4914 ब्लॉकों में उद्यम पंजीकरण अभियान और ‘रैम्प’ योजना के तहत क्षमता निर्माण कार्यक्र म जैसे कई पहल शुरू किए गए हैं।

स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र पर जानकारी देते हुए सिंह ने बताया कि 2020 में जहाँ केवल 69 पंजीकरण थे, वहीं 2025 में यह संख्या 1,127 तक पहुँच गई है, जिनमें प्रौद्योगिकी और सेवा आधारित उपक्र मों पर विशेष ध्यान है। बैठक में यह भी बताया गया कि जम्मू-कश्मीर इस वर्ष अक्टूबर में स्टार्टअप इंडिया, मेइटी और सिडबी के सहयोग से श्रीनगर में एक स्टार्टअप शिखर सम्मेलन आयोजित करने जा रहा है। यह भी सूचित किया गया कि जम्मू-कश्मीर में 4.39 लाख कारीगर पंजीकृत हैं और 2023-24 में निर्यात दोगुना बढ़कर 1163 करोड़ रु पये तक पहुँच गया है। श्रीनगर को विश्व शिल्प परिषद द्वारा विश्व शिल्प नगर का दर्जा मिला है और यूनेस्को की रचनात्मक नगर नेटवर्क में भी मान्यता प्राप्त हुई है। शिल्प उत्पादों के लिए क्यूआर-आधारित प्रमाणन प्रणाली, जो विश्व स्तर पर पहली बार है, भी शुरू की गई है। समीक्षा बैठक में उपमुख्यमंत्री सुरिंदर कुमार चौधरी, जो उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री भी हैं, मुख्यमंत्री के सलाहकार नसीर असलम वानी, मुख्य सचिव अटल डुल्लू, मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव धीरज गुप्ता, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के प्रमुख और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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