जम्मू: जम्मू-कश्मीर (J-K) के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) एसपी वैद ने जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के प्रमुख यासीन मलिक के दावों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। मलिक ने हाल ही में एक हलफनामे में दावा किया था कि उन्होंने पाकिस्तान जाकर लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख हाफिज सईद से मुलाकात की थी और बाद में इस मुलाकात की जानकारी तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को दी थी। इस पर वैद ने इसे बेहद शर्मनाक बताते हुए कहा कि एक आतंकवादी का इस्तेमाल कूटनीतिक कार्यों के लिए किया गया, यह भारत सरकार के लिए अपमानजनक है।
यासीन मलिक, जो आतंकवाद से जुड़े मामलों में दोषी ठहराए गए और 2017 के आतंकी वित्तपोषण मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं, ने दिल्ली उच्च न्यायालय में दायर एक हलफनामे में दावा किया कि उन्होंने 2000 के दशक की शुरुआत में पाकिस्तान में हाफिज सईद से मुलाकात की थी। इसके बाद उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को इस मुलाकात के बारे में जानकारी दी थी।
मलिक का कहना था कि भारत सरकार ने उन्हें कश्मीर में शांति प्रक्रिया में शामिल होने के लिए कई बार नियुक्त किया था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भारतीय प्रतिष्ठान ने बाद में उन बैठकों को तोड़-मरोड़ कर उन्हें एक साजिशकर्ता के रूप में प्रस्तुत किया।
एसपी वैद ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह शर्मनाक है कि एक व्यक्ति, जो कई हत्याओं में शामिल है और आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त है, उसे कूटनीतिक मिशन के लिए इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा, “यह तो जैसे आतंकवादी को शांति की बात करने भेज दिया गया हो, जो खुद भारत से नफ़रत करता है और हज़ारों भारतीयों की हत्या का जिम्मेदार है।” वैद ने यह भी कहा कि ऐसे कृत्य से भारत की कूटनीति की साख पर सवाल उठते हैं। उन्होंने यह फैसला जनता पर छोड़ दिया कि वे किस तरह की सरकार चाहते हैं और क्या यह कूटनीतिक रणनीतियां देश के लिए सही हैं।
इससे पहले, यासीन मलिक ने 2017 में अपनी सजा के दौरान भी यह दावा किया था कि कई भारतीय सरकारों ने उन्हें कश्मीर में शांति वार्ता में शामिल होने के लिए कई बार आमंत्रित किया था, और उन्होंने हमेशा इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की कोशिश की थी।
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