नई दिल्ली: भारत 2047 तक 35 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के अपने महत्वाकांक्षी लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है, जिसमें मैन्युफैक्चरिंग सैक्टर को प्रमुख इंजन माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि पीएलआई योजना, नैशनल मैन्युफैरिंग मिशन और स्किल डिवैल्पमैंट पहल जैसे सुधारों से इस क्षेत्र को मजबूत आधार मिल रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, मैन्युफैरिंग सैक्टर ने वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद मजबूती दिखाई है।
औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) ने जुलाई 2025 में सालाना आधार पर 3.5% की वृद्धि दर्ज की, जो जून के 1.5 प्रतिशत से काफी अधिक है। यह वृद्धि मैन्युफैरिंग, माइनिंग और इलैक्ट्रिसिटी क्षेत्रों में उत्पादन की गति को दर्शाती है। मैन्युफैरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडैक्स (पीएमआई) जून 2025 के 58.4 से बढ़कर जुलाई में 59.1 और अगस्त में 59.3 पर पहुंच गया, जो 17 वर्षों में परिचालन स्थितियों में सबसे तेज सुधार को दर्शाता है। निर्यात में भी इस क्षेत्र का योगदान बढ़ा है।
अप्रैल-अगस्त 2025 में भारत का कुल निर्यात 6.18% बढ़कर 349.35 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसी अवधि में व्यापारिक निर्यात 2.52% बढ़कर 184.13 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में 179.60 अरब डॉलर था। सरकारी अनुमानों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 तक भारत का मैन्युफैरिंग सैक्टर 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है और 2030 तक यह वैश्विक अर्थव्यवस्था में सालाना 500 बिलियन डॉलर से अधिक का योगदान कर सकता है। अगस्त 2025 में बेरोजगारी दर 5.0 प्रतिशत पर आ गई, जो पिछले पांच महीनों में सबसे कम स्तर है।
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