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मंत्री विक्रमादित्य सिंह और डॉ. अमरीन कौर बने जीवनसाथी, प्रभदीप सिंह संधू ने दिया आशीर्वाद

September 22, 2025

मंत्री विक्रमादित्य सिंह और डॉ. अमरीन कौर बने जीवनसाथी, प्रभदीप सिंह संधू ने दिया आशीर्वाद

हिमाचल प्रदेश: लोक निर्माण एवं शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने आज चंडीगढ़ स्थित सेक्टर 11 के ऐतिहासिक गुरुद्वारा साहिब में एक सादगीपूर्ण किंतु गरिमामय समारोह में डॉ. अमरीन कौर से विवाह रचाया। यह अवसर केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं, बल्कि हिमाचल और पंजाब की शाही विरासत, आधुनिक राजनीति और शिक्षा की त्रिवेणी का प्रतीक बन गया।

विवाह समारोह में हिमाचल और पंजाब की विभिन्न रियासतों के शाही सदस्यों की उपस्थिति ने इस आयोजन को विशिष्ट बना दिया। पटियाला और फरीदकोट के शाही परिवारों के प्रतिनिधि, साथ ही शहज़ादपुर रियासत के प्रभदीप सिंह संधू ने नवविवाहित जोड़े को आशीर्वाद दिया।

नई शुरुआत, नई उम्मीदें

बुशहर राजघराने के वारिस और पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह के पुत्र विक्रमादित्य सिंह के लिए यह विवाह दूसरी पारी है। उनकी पहली शादी वर्ष 2019 में हुई थी, जो 2020 में तलाक के साथ समाप्त हुई। अब एक शिक्षित और आत्मनिर्भर साथी के रूप में डॉ. अमरीन कौर उनके जीवन में नई शुरुआत लेकर आई हैं।

डॉ. अमरीन कौर  विद्या, गरिमा और स्वतंत्रता की प्रतिमूर्ति

डॉ. अमरीन सेखों एक बहुआयामी व्यक्तित्व हैं। उन्होंने अंग्रेज़ी और मनोविज्ञान में दोहरी स्नातकोत्तर डिग्रियां प्राप्त की हैं और मनोविज्ञान में पीएचडी पूरी की है। वर्तमान में वे पंजाब विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं। यह उनकी पहली शादी है और उनकी उम्र लगभग 35 वर्ष बताई जा रही है।

विक्रमादित्य सिंह: युवा नेतृत्व की पहचान

राजनीतिक विरासत से जुड़े होने के बावजूद विक्रमादित्य सिंह ने अपनी अलग पहचान बनाई है। शिमला ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले विक्रमादित्य न केवल युवा चेहरा हैं, बल्कि प्रदेश की अधोसंरचना और शहरी विकास को नई दिशा देने में भी अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। बिशप कॉटन स्कूल, दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज और लंदन विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त विक्रमादित्य, परंपरा और आधुनिकता का आदर्श संगम माने जाते हैं।

राजनीतिक और शाही परिवारों का मिलन

यह विवाह केवल एक पारिवारिक आयोजन नहीं था, बल्कि हिमाचल और पंजाब की राजनैतिक-सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक भी था। शाही और राजनीतिक परिवारों के बीच यह गठबंधन दोनों क्षेत्रों में सामाजिक संवाद और सहयोग की नई संभावनाएं खोल सकता है।

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