
अगरतला: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को नवरात्र के पहले दिन त्रिपुरा के गोमती जिले के उदयपुर में स्थित 524 साल पुराने त्रिपुर सुंदरी मंदिर में दर्शन पूजन किया। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने पुनर्विकसित त्रिपुर सुंदरी मंदिर परिसर में नयी सुविधाओं का उद्घाटन किया। ज्ञात रहे कि त्रिपुर सुंदरी मंदिर देवी के 51 शक्तिपीठों में से एक है।
मोदी ने राज्यपाल इंद्रसेन रेड्डी नल्लू और मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा के साथ मंदिर परिसर के पास के नवनिर्मित परिसर का दौरा किया। इसके साथ ही उन्होंने त्रिपुरा और मंदिर के इतिहास को दर्शाने वाली एक प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया।
इस मंदिर का निर्माण वर्ष 1501 में महाराजा धन्या माणिक्य ने करवाया था। शुरू में यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित था, लेकिन एक दिव्य स्वप्न में देवी माया ने महाराजा को आदेश दिया कि उन्हें इस स्थान पर अपने सुंदरतम रूप में प्रतिष्ठित किया जाए।
यहाँ भगवान विष्णु की पूजा शालिग्राम शिला के रूप में की जाती है, जो कि काले रंग का एक पवित्र पत्थर होता है। ऐसा उदाहरण कि शक्ति पीठ या काली मंदिर में देवी शक्ति के साथ भगवान विष्णु की पूजा हो, बहुत ही दुर्लभ है। यही इस मंदिर की खासियत भी है।
यहाँ त्रिपुर सुंदरी माता की एक बड़ी मूर्ति (लगभग 5 फीट ऊँची) और एक छोटी मूर्ति ‘छोटो-मा’ (लगभग 2 फीट ऊँची) है। ‘छोटो-मा’ को पहले विशेष अवसरों जैसे राजाओं द्वारा युद्ध, शिकार या उत्सवों में साथ ले जाया था।
यहाँ देवी शक्ति को माँ त्रिपुर सुंदरी के रूप में पूजा जाता है और उनके साथ भैरव को त्रिपुरेश के नाम से जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि राज्य का नाम ‘त्रिपुरा’ भी देवी त्रिपुर सुंदरी से ही जुड़ा है, जिससे यह मंदिर राज्य की संस्कृति और आस्था का केंद्र बन गया है।
ऐसी लोककथाएँ हैं कि वर्तमान में जो मूर्ति स्थापित है, वह पास के ‘ब्रह्मछरा’ जलस्रोत से प्राप्त हुई थी। मूर्ति के चरणों के नीचे श्री यंत्र बना हुआ है, जो एक दिव्य और पवित्र ज्यामितीय आकृति है। इसे देखना या इसकी पूजा करना अनेक शुभ कर्मों के समान माना जाता है।
माँ को विशेष रूप से लाल गुड़हल का फूल अर्पित किया जाता है और पेडा प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है। यह ‘माताबाड़ी पेडा’ अब GI टैग प्राप्त कर चुका है। हर साल दीवाली के अवसर पर यहाँ दो दिवसीय दीवाली मेला आयोजित होता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु भारत और बांग्लादेश सहित विभिन्न स्थानों से आते हैं। यह मेला त्रिपुरा की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाता है।
मंदिर का प्रबंधन राज्य सरकार द्वारा नियुक्त समिति और माता त्रिपुर सुंदरी मंदिर ट्रस्ट द्वारा किया जाता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर कहते हैं कि पर्यटन हमारे विरासत और विकास के बीच एक सेतु है। खासकर आध्यात्मिक पर्यटन को उन्होंने भारत की प्रगति में एक अहम भूमिका दी है। तीर्थ स्थल न केवल आस्था के केंद्र होते हैं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान और समुदाय की भावना के जीवंत प्रतीक भी हैं।
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मेष: दिन शुभ रहेगा...