रोम: फिलिस्तीन को लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में उठते बवंडर के बीच इटली एक नए संकट का सामना कर रहा है। प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। बता दें कि फ्रांस, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और पुर्तगाल जैसे प्रमुख देशों ने फिलिस्तीन को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में औपचारिक मान्यता दे दी। लेकिन इटली ने इस दिशा में अब तक कोई पहल नहीं की।
गाजा पर युद्ध और इटली की चुप्पी बनी वजह
गाजा में जारी संघर्ष और मानवीय संकट को लेकर दुनियाभर में चिंता जताई जा रही है। ऐसे में इटली सरकार की ओर से फिलिस्तीन को मान्यता न देना और युद्धविराम की सार्वजनिक अपील से बचना, जनता के एक बड़े वर्ग को नागवार गुजर रहा है। प्रदर्शनकारी मांग कर रहे हैं कि इटली को भी अन्य देशों की तरह फिलिस्तीन को एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में मान्यता देनी चाहिए और गाजा में तत्काल युद्धविराम की मांग करनी चाहिए।
मिलान और रोम में बेकाबू भीड़
सबसे ज्यादा तनाव मिलान और रोम में देखा गया, जहां हजारों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए। मिलान के सेंट्रल रेलवे स्टेशन में प्रदर्शनकारियों ने अचानक धावा बोल दिया। काले कपड़ों में आए लोगों ने हाथों में डंडे और बैनर लेकर स्टेशन में तोड़फोड़ शुरू कर दी। पुलिस को हालात संभालने के लिए वॉटर कैनन, आंसू गैस और बल प्रयोग का सहारा लेना पड़ा। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने स्मोक बम, बोतलें और पत्थर फेंके, जिससे कई पुलिसकर्मी घायल हो गए।
कारोबार पर भी पड़ा असर
प्रदर्शन सिर्फ राजधानी तक सीमित नहीं रहे। नेपल्स जैसे प्रमुख पोर्ट शहरों में प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर जाम लगाया और मालवाहक ट्रेनों को रोक दिया। कई जगहों पर रेल सेवाएं बाधित रहीं और पोर्ट पर व्यापारिक गतिविधियां ठप हो गईं। इससे इटली के आयात-निर्यात कारोबार पर भी प्रतिकूल असर पड़ा है।
सरकार की सख्त प्रतिक्रिया
इस पूरे घटनाक्रम पर प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा, “देश में हिंसा फैलाकर किसी नीति में बदलाव की उम्मीद करना लोकतंत्र के मूल्यों के खिलाफ है।” मेलोनी ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल इटली सरकार फिलिस्तीन को मान्यता देने पर पुनर्विचार नहीं कर रही है।
प्रदर्शनकारियों की मांगें क्या हैं?
गाजा में तत्काल युद्धविराम की अपील करे इटली।
फिलिस्तीन को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता दी जाए।
इजरायल के खिलाफ निष्पक्ष और कड़ा रुख अपनाया जाए।
मानवीय सहायता को लेकर इटली अधिक सक्रिय भूमिका निभाए।