नई दिल्ली: घरेलू शेयर बाजार में मंगलवार को मंदी का माहौल छाया रहा। कारोबार की शुरुआत से ही प्रमुख सूचकांक दबाव में नजर आए। सेंसेक्स करीब 163 अंकों की गिरावट के साथ 81,996.80 के स्तर पर कारोबार करता दिखा, वहीं निफ्टी भी 56.95 अंक लुढ़ककर 25,145.40 पर आ गया। यह गिरावट वैश्विक संकेतों, डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी और अमेरिका की नई व्यापार नीतियों के असर के चलते देखी गई।
प्रमुख सेक्टर्स में मिला-जुला प्रदर्शन
हालांकि, इस गिरावट के बीच कुछ सेक्टर्स ने मजबूती दिखाई। निफ्टी ऑटो इंडेक्स ने 1.4% की बढ़त के साथ सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। दूसरी ओर, आईटी, रियल्टी और पीएसयू बैंक सेक्टरों में हल्की गिरावट दर्ज की गई।
आईटी सेक्टर की शुरुआत धीमी रही,
रियल्टी और पीएसयू बैंक इंडेक्स करीब 0.3% गिरकर कारोबार करते नजर आए।
रुपये में भारी गिरावट
विदेशी मुद्रा बाजार में भी भारत के लिए निराशाजनक खबर रही। डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 25 पैसे टूटकर 88.53 के अपने अब तक के सबसे निचले इंट्राडे स्तर पर पहुंच गया। इस गिरावट की मुख्य वजह अमेरिका द्वारा भारतीय आयात पर टैरिफ बढ़ाना और H-1B वीजा फीस में इज़ाफा है, जिससे विदेशी निवेशकों की भावनाओं पर नकारात्मक असर पड़ा।

एशियाई बाजारों से मिला-जुला संकेत
वैश्विक मोर्चे पर, एशियाई शेयर बाजारों में मिला-जुला कारोबार देखने को मिला।
टोक्यो में अवकाश के चलते बाज़ार बंद रहा।
ऑस्ट्रेलिया का ASX 200 0.6% की बढ़त के साथ 8,861.10 पर पहुंचा।
दक्षिण कोरिया का कोस्पी भी 0.3% बढ़कर 3,479.23 पर पहुंचा।
वहीं, हांगकांग का हैंग सेंग 0.8% गिरकर 26,125.56 पर आ गया।
शंघाई कंपोजिट में भी 1.0% की गिरावट दर्ज हुई और यह 3,788.66 पर बंद हुआ।
वॉल स्ट्रीट का दबदबा कायम
अमेरिकी बाजारों की बात करें तो, एसएंडपी 500, डॉव जोन्स, और नैस्डैक ने लगातार तीसरे दिन नए रिकॉर्ड स्तर छूए।
एसएंडपी 500 0.4% चढ़ा,
डॉव जोन्स 66 अंकों की तेजी के साथ 0.1% बढ़ा,
और नैस्डैक कंपोजिट 0.7% ऊपर बंद हुआ।
बाजार का विश्लेषण
वर्तमान गिरावट को अल्पकालिक करेक्शन माना जा सकता है, जो वैश्विक घटनाक्रम, मुद्रा बाजार की अस्थिरता और नीतिगत अनिश्चितताओं से प्रेरित है। हालांकि, ऑटो सेक्टर में मजबूती और अमेरिकी बाजारों की सकारात्मक चाल घरेलू निवेशकों के लिए कुछ राहत लेकर आई है।