दुनिया की प्राचीन संस्कृतियों में एक समानता दिखेगी। चूंकि मानव सभ्यता की शुरूआत कृषि संस्कृति के साथ हुई है, इसलिए सभी प्राचीन सभ्यताओं के उत्सव, तीज और त्योहार खेती-किसानी और फसल की उपज पर केंद्रित हैं। इस संदर्भ में देखें तो चीन के किसानों का फसल उत्सव सभ्यता की प्राचीन नींव पर टिका नजर आता है। उसकी नींव भले ही सभ्यतागत है,लेकिन वह आधुनिकता के साथ ही कदम से कदम मिलाकर बढ़ता नजर आता है।
बीते 23 सितंबर को चीन के विशेषकर पूर्वी हिस्से में किसानों का फसल उत्सव मनाया गया। इसकी शुरूआत चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग की प्रेरणा से साल 2018 में हुई थी। इस नाते इस वर्ष का यह त्योहार आठवां था। ध्यान देने की बात यह है कि चीन में इन दिनों 14वीं पंचवर्षीय योजना चल रही है। इसके तहत ही देश के विकास की गाथा लिखी जा रही है। यहां ध्यान देने की बात यह है कि साल 2025, 14वीं पंचवर्षीय योजना का आखिरी साल है। इस योजना के तहत चीन सरकार ने गरीबी उन्मूलन की उपलब्धियों को और बढ़ाने और ग्रामीण पुनरोद्धार को उससे प्रभावी रूप से जोड़ने की कोशिश में प्राण-पण से जुटी हुई है। इसलिए इस बार का फसल त्योहार खास बन गया है। इस बार की फसल का उद्देश्य ग्रामीण इलाकों को शहरी मुख्यधारा के विकास के साथ जोड़ने के साथ ही ग्रामीण इलाकों में भी बड़ा बाजार और सहूलियतें विकसति करने पर भी रहा है। कहना न होगा कि चीन का फसल त्योहार इसमें सफल नजर आ रहा है।
चीन के इस त्योहार का मुख्य उद्देश्य देश में प्रचुर फसल के उत्पादन के लिए किसानों को प्रोत्साहित करना और उसके उत्पादन को लेकर उनकी भागीदारी के साथ जश्न मनाना तो है ही, इसके साथ किसानों की कड़ी मेहनत का सम्मान करना और ग्रामीण संस्कृति को बढ़ावा देना है। इस त्योहार का मकसद किसानों की आय में वृद्धि के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों के आधुनिकीकरण को भी बढ़ाना है। यह त्योहार कृषि उत्पादों को बढ़ावा देता है, पारंपरिक और आधुनिक कृषि तकनीकों को एकीकृत करता है, और ग्रामीण पुनरोद्धार के लिए योगदान करने वाले किसानों की रचनात्मकता को प्रोत्साहित करता है। इसका असर चीन में दिख भी रहा है। साल 2024 में चीन में रिकार्ड अन्न के उत्पादन का आंकड़ा पार किया गया है। रिकॉर्ड पैदावार के पीछे किसानों की कठिन मेहनत और उन्हें मिलने वाला सरकारी प्रोत्साहन भी है। किसान फसल उत्सव के जरिए चीन की सरकार ने अपने किसानों का मनोबल बढ़ाया है। यही वजह है कि चीन में इस बार ऐसे नतीजे देखने को मिल रहे हैं। चीन सरकार की ओर से जारी चीन कृषि परिदृश्य रिपोर्ट -2025-2034 के अनुसार अगले साल यानी 2025 में चीन में खाद्यान्न का उत्पादन 709 मिलियन टन को पार कर सकता है। इसकी बड़ी वजह चीन में किसानों को मिल रहा प्रोत्साहन ही है।
फसल उत्पादन के जरिए चीन के किसानों की जहां हालत सुधरी है, वहीं चीन सरकार की अन्न निर्भरता लगातार संतुलित होती जा रही है। एक आंकड़े के मुताबिक, चीन अब गेहूँ, चावल और मक्के के मामले में लगभग आत्मनिर्भर है। हॉवर्ड श्नाइडर ने कुछ वक्त पहले वाशिंगटन पोस्ट में लिखी अपनी रिपोर्ट में कहा था कि चीन सरकार ने किसानों के लिए आधार मूल्य निर्धारित करने जैसे उपायों के माध्यम से इन फसलों के उत्पादन को प्रोत्साहित किया है। चीन की इस अन्न निर्भरता पर दुनिया की कमोडिटी ट्रेडिंग कंपनियों के साथ ही अमेरिकी किसानों, विश्व बैंक और वैश्विक खाद्य सुरक्षा से जुड़े अन्य संगठनों की निगाह बनी हुई है। चीन के मुख्य रूप से मक्का, सोयाबीन, चावल और मोटे अनाजों का दुनिया के कई देशों में निर्यात करता है। जहां तक मक्का के निर्यात की बात है, चीन इसका महत्वपूर्ण निर्यातक देश है। इसके जरिए वह वैश्विक खाद्य आपूर्ति में योगदान दे रहा है। इसी तरह चीन सोयाबीन के निर्यात में भी प्रमुख स्थान रखता है। चावल भी चीन के कृषि निर्यात में शामिल एक मुख्य उत्पाद है। चीन मोटा अनाज और अन्य कृषि उत्पादों का भी निर्यात करता है।
(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग) (लेखक— उमेश चतुर्वेदी)