
नेशनल डेस्क: कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को केंद्र सरकार से लद्दाख के लोगों के साथ बातचीत करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार को “बातचीत करनी चाहिए और हिंसा व डर की राजनीति को बंद करना चाहिए।” राहुल गांधी ने हाल ही में लेह में हुई हिंसा की निष्पक्ष जांच की भी मांग की, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई थी। कांग्रेस नेता ने केंद्र पर निशाना साधते हुए कहा कि मोदी जी, आपने लद्दाख के लोगों के साथ विश्वासघात किया है।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा कि मारे गए लोगों में से एक सैनिक परिवार से था। उन्होंने लिखा, “एक सैनिक का बेटा, जिसका खून देशभक्ति से भरा है, उस पर गोली चलाना बहुत दुखद है। भाजपा सरकार ने एक वीर सपूत को सिर्फ इसलिए मार दिया, क्योंकि वह लद्दाख और उसके अधिकारों के लिए खड़ा था। अब उस सैनिक के पिता की आंखों में बस एक सवाल है, क्या यही है देश सेवा का इनाम?”
पिता फौजी, बेटा भी फौजी – जिनके खून में देशभक्ति बसी है।
फिर भी BJP सरकार ने देश के वीर बेटे की गोली मारकर जान ले ली, सिर्फ इसलिए क्योंकि वो लद्दाख और अपने अधिकार के लिए खड़ा था।
पिता की दर्द भरी आंखें बस एक सवाल कर रही हैं – क्या आज देशसेवा का यही सिला है?
हमारी मांग है कि… pic.twitter.com/cJqKstISjg
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) September 30, 2025
राहुल गांधी ने इस मामले को “हत्या” बताते हुए सरकार से निष्पक्ष न्यायिक जांच की मांग की। उन्होंने कहा, “हमारी मांग है कि लद्दाख में हुई इन हत्याओं की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों को सख्त से सख्त सजा मिले। मोदी जी, आपने लद्दाख के लोगों के साथ विश्वासघात किया है।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लद्दाख के लोग “अपने अधिकारों की मांग” कर रहे हैं। राहुल गांधी ने कहा, “लद्दाख के लोग सिर्फ अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं, उनसे बातचीत करें और हिंसा की राजनीति बंद करें।”
यह हिंसा 24 सितंबर को लेह में विरोध प्रदर्शनों के दौरान भड़की थी, जब स्थानीय भाजपा कार्यालय में आग लगा दी गई थी। इस झड़प में चार लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद, जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत गिरफ्तार कर लिया गया था। उन पर “हिंसा भड़काने” का आरोप लगाया गया था।
लद्दाख के लोग केंद्र सरकार से यह मांग कर रहे हैं कि उन्हें संविधान की छठी अनुसूची में शामिल किया जाए। इस अनुसूची के तहत, कुछ राज्यों में जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन के लिए विशेष प्रावधान होते हैं, जिसमें असम, मिजोरम, त्रिपुरा और मेघालय शामिल हैं। लद्दाख को भी इस सूची में शामिल करने की मांग की जा रही है ताकि वहां के लोग अपनी संस्कृति और अधिकारों की रक्षा कर सकें। जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक लंबे समय से इस मांग का समर्थन कर रहे हैं, ताकि लद्दाख में स्वायत्तता और विकास को बढ़ावा दिया जा सके।