
नई दिल्ली: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हस्तक्षेप की अपील की और हाल ही में आई अभूतपूर्व बाढ़ से हुए भारी नुकसान को देखते हुए राज्य के लिए एक विशेष पैकेज की मांग की।
मुख्यमंत्री ने आज अमित शाह से उनके आवास पर मुलाकात की और कहा कि राज्य को हुए भारी नुकसान को देखते हुए केंद्र द्वारा घोषित 1600 करोड़ रुपये की राहत राशि नगण्य है। उन्होंने एसडीआरएफ/एनडीआरएफ से बाढ़ पीड़ितों को मुआवजा देने के मानदंडों में भी संशोधन की मांग की।
उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री को बताया कि पंजाब ने दशकों में आई सबसे भीषण बाढ़ का सामना किया है, जिससे 2614 गाँवों के 20 लाख से ज़्यादा लोग प्रभावित हुए हैं और 6.87 लाख लोग विस्थापित हुए हैं।
सिंह मान ने कहा कि इस आपदा से व्यापक नुकसान हुआ है क्योंकि 4.8 लाख एकड़ से ज़्यादा फसलें नष्ट हो गईं, 17,000 से ज़्यादा घर क्षतिग्रस्त हो गए, 2.5 लाख से ज़्यादा पशुधन प्रभावित हुए और 4657 किलोमीटर ग्रामीण सड़कों, 485 पुलों, 1,417 पुलियों और 190 मंडियों को भारी नुकसान पहुँचा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नुकसान का प्रारंभिक अनुमान 13,832 करोड़ रुपये है, जिसमें कृषि, बुनियादी ढाँचा, स्वास्थ्य, शिक्षा और आजीविका शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि मौजूदा एसडीआरएफ/एनडीआरएफ मानदंड नुकसान के वास्तविक पैमाने का आकलन करने के लिए बेहद अपर्याप्त हैं। उन्होंने यह भी कहा कि गृह मंत्रालय द्वारा 33% या उससे अधिक फसल नुकसान के लिए इनपुट सब्सिडी 6800 रुपये प्रति एकड़ तय की गई है।
भगवंत सिंह मान ने कहा कि इतनी कम राशि का भुगतान किसानों के साथ अन्याय होगा क्योंकि फसलें लगभग कटाई के चरण में हैं, इसलिए किसानों को 50,000 रुपये प्रति एकड़ का भुगतान किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि बाढ़ पीड़ितों को राहत पहुँचाने के लिए राज्य सरकार ने एसडीआरएफ मानदंडों के तहत 26 से 33 प्रतिशत फसल क्षति के लिए मौजूदा 2000 रुपये प्रति एकड़ से बढ़ाकर 10,000 रुपये प्रति एकड़, 33 से 75 प्रतिशत फसल क्षति के लिए मौजूदा 6800 रुपये प्रति एकड़ से बढ़ाकर 10,000 रुपये प्रति एकड़ और 75 से 100 प्रतिशत फसल क्षति के लिए मौजूदा 6800 रुपये से बढ़ाकर 20,000 रुपये प्रति एकड़ करने का निर्णय लिया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को दिए जा रहे 20,000 रुपये प्रति एकड़ मुआवजे में राज्य सरकार 14,900 रुपये का योगदान देगी, जो देश में सबसे अधिक है।
उन्होंने कहा कि मैदानी क्षेत्रों में पूरी तरह से क्षतिग्रस्त/नष्ट हुए घरों और गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त घरों के लिए मौजूदा 1.20 लाख रुपये प्रति घर से दोगुना करके 2.40 लाख रुपये प्रति घर किया जाना चाहिए।
इसी प्रकार, भगवंत सिंह मान ने कहा कि आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त घरों (झोपड़ियों को छोड़कर) के लिए मुआवज़ा पक्के घरों के लिए मौजूदा 6500 रुपये प्रति घर के बजाय 50,000 रुपये प्रति घर और कच्चे घरों के लिए मौजूदा 4000 रुपये प्रति घर के बजाय 10,000 रुपये प्रति घर दिया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि घर से जुड़े पशुशालाओं के लिए मौजूदा 3000 रुपये के बजाय 10,000 रुपये मुआवज़ा दिया जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि पंजाब ने इस साल 1988 के बाद से सबसे भीषण अभूतपूर्व बाढ़ का सामना किया है और प्रारंभिक आकलन के अनुसार, इस प्राकृतिक आपदा के कारण लगभग 1,900 गाँव जलमग्न हो गए हैं, जिससे कृषक समुदाय को भारी संकट का सामना करना पड़ रहा है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि इस आपदा का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ा है और लगभग 4 लाख एकड़ बोई गई भूमि पर फसल को नुकसान पहुँचा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरदासपुर, अमृतसर, फाजिल्का, कपूरथला और फिरोजपुर सबसे अधिक प्रभावित जिले हैं, इसलिए कृपया खरीफ विपणन सीजन 2025-26 के लिए राज्य को छूट दी जाए। उन्होंने कहा कि भारत सरकार का खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग (डीएफपीडी) खरीफ विपणन सीजन 2025-26 के दौरान धान की खरीद के लिए प्राथमिकता के आधार पर छूट दे सकता है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह सुनिश्चित करना ज़रूरी है कि किसानों को प्राकृतिक आपदा से पहले ही हुए नुकसान के अलावा और कोई परेशानी न हो।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हर साल विभिन्न स्थानों पर बाढ़ सुरक्षा कार्य किए जाते हैं, लेकिन राज्य सरकार के पास पर्याप्त धनराशि नहीं है और अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर बाढ़ सुरक्षा के लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध कराना संभव नहीं है।
उन्होंने गृह मंत्री को अवगत कराया कि बीएसएफ के साथ हुई बैठक में, उन्होंने बताया कि बीएसएफ द्वारा संचालित सीमा चौकियाँ बाढ़ के पानी से खतरे में हैं। भगवंत सिंह मान ने कहा कि सीमावर्ती जिलों के उपायुक्तों ने बीएसएफ से एकत्रित परियोजनाओं की एक सूची उपलब्ध कराई है, जिन्हें बाढ़ से तत्काल सुरक्षा की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कार्यों के क्रियान्वयन हेतु धनराशि जारी करने के लिए 175.96 करोड़ रुपये की एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट केंद्रीय जल आयोग और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, नई दिल्ली को प्रस्तुत की गई है।
उन्होंने कहा कि पिछले एक वर्ष के दौरान राज्य सरकार द्वारा केंद्रीय कार्यकारिणी समिति और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के साथ कई बैठकें की गई हैं, हालाँकि, अभी भी उनकी प्रतिक्रिया का इंतज़ार है। इसलिए, भगवंत सिंह मान ने केंद्रीय गृह मंत्री से अनुरोध किया कि आवश्यक धनराशि जल्द से जल्द जारी की जाए ताकि कार्य समय पर पूरे किए जा सकें।
11297 करोड़ रुपये के आरडीएफ और बाज़ार शुल्क के लंबित हिस्से का मुद्दा उठाते हुए, मुख्यमंत्री ने इस बात पर खेद व्यक्त किया कि पंजाब ग्रामीण विकास अधिनियम, 1987 की धारा 7 और पंजाब कृषि उत्पाद विपणन अधिनियम, 1961 की धारा 23 के तहत भुगतान का स्पष्ट प्रावधान होने के बावजूद, राज्य सरकार को ग्रामीण विकास शुल्क और बाज़ार शुल्क की प्रतिपूर्ति नहीं की जा रही है।
उन्होंने कहा कि इस कोष का उद्देश्य कृषि और ग्रामीण बुनियादी ढाँचे को बढ़ावा देना है, जो अंततः कृषि के समग्र विकास में योगदान देगा, जैसे ग्रामीण सड़क नेटवर्क, विपणन बुनियादी ढाँचा, भंडारण सुविधा का विस्तार, भूमि रिकॉर्ड का कम्प्यूटरीकरण, मंडियों का स्वचालन और मशीनीकरण आदि।
भगवंत सिंह मान ने कहा कि राज्य सरकार ने डीएफपीडी भारत सरकार के निर्देशों के अनुसार पंजाब ग्रामीण विकास अधिनियम, 1987 में संशोधन किया है, लेकिन डीएफपीडी के सभी निर्देशों का पालन करने के बावजूद, केएमएस 2021-22 से राज्य सरकार को आरडीएफ की अनुमति नहीं दी गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन निधियों की प्रतिपूर्ति न होने के कारण राज्य गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर रहा है, जिससे ग्रामीण बुनियादी ढांचे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास और रखरखाव पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने गृह मंत्री से आग्रह किया कि बुनियादी ढांचे के विकास के काम को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए राज्य को आरडीएफ और बाजार शुल्क की प्रतिपूर्ति की जाए।
भगवंत सिंह मान ने राज्य में आढ़तिया कमीशन के अल्प भत्ते का मुद्दा भी उठाया और कहा कि पंजाब में, पंजाब कृषि उत्पाद विपणन अधिनियम, 1961 के प्रावधानों के अनुसार, आढ़तिया कमीशन न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के 2.5% की दर से देय है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2019-20 के खरीद सत्र से आढ़तिया कमीशन अपरिवर्तित रहा है और वर्तमान में गेहूँ के लिए 46.00 रुपये प्रति क्विंटल और धान के लिए 45.88 रुपये प्रति क्विंटल की सीमा तय की गई है। उन्होंने कहा कि पंजाब कृषि उत्पाद विपणन अधिनियम, 1961 के अनुसार, खरीफ विपणन मौसम 2025-26 के लिए आढ़तियों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के 2.5% की दर से आढ़तिया कमीशन, यानी 59.73 रुपये प्रति क्विंटल देय है। हालाँकि, भगवंत सिंह मान ने कहा कि भारत सरकार ने धान के लिए 45.88 रुपये प्रति क्विंटल की दर से आढ़तिया कमीशन की अनुमति दी है, जिससे आढ़तियों में असंतोष फैल रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने इन मुद्दों के शीघ्र समाधान के लिए भारत सरकार से अनुरोध किया है, लेकिन ये मुद्दे अभी भी लंबित हैं। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे के समाधान में और देरी से आढ़तिया समुदाय में अनावश्यक अशांति या आंदोलन पैदा हो सकता है, जिससे राज्य में सुचारू खरीद प्रक्रिया बाधित हो सकती है।
अतः, भगवंत सिंह मान ने केंद्रीय गृह मंत्री से अनुरोध किया कि वे संबंधित अधिकारियों को आढ़तिया कमीशन दरों को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने/संशोधित करने का निर्देश दें।
राज्य में चावल की आवाजाही और पेग योजना के तहत ढके हुए गोदामों के निर्माण का मुद्दा उठाते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब में लगभग 180 लाख मीट्रिक टन की कुल ढकी हुई भंडारण क्षमता है, जिसके सापेक्ष वर्तमान में लगभग 171 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न भंडार (140 लाख मीट्रिक टन चावल और 31 लाख मीट्रिक टन गेहूँ) ढके हुए स्थान पर रखा हुआ है।
उन्होंने बताया कि चालू खरीफ विपणन सीजन 2025-26 के लिए मिल मालिकों द्वारा कस्टम मिल्ड चावल की डिलीवरी दिसंबर 2025 में शुरू होगी और 30 जून, 2026 तक 117-120 लाख मीट्रिक टन चावल एफसीआई को दिया जाना है।
भगवंत सिंह मान ने बताया कि अभी तक चावल प्राप्ति के लिए केवल 9 लाख मीट्रिक टन कवर्ड स्थान उपलब्ध है और पिछले दो महीनों से राज्य से केवल 5 लाख मीट्रिक टन चावल ही भेजा गया है, जिसके अनुसार दिसंबर 2025 तक केवल 19 लाख मीट्रिक टन स्थान उपलब्ध होगा और खरीफ विपणन सीजन 2025-26 के चावल की समय पर डिलीवरी पूरी करने के लिए जून 2026 तक 100 लाख मीट्रिक टन स्थान की आवश्यकता होगी।
तदनुसार, मुख्यमंत्री ने कहा कि जून, 2026 तक हर महीने कम से कम 10-12 लाख मीट्रिक टन चावल की आवाजाही आवश्यक है। उन्होंने आगे कहा कि इसे देखते हुए, चावल की इस आवाजाही को सुनिश्चित करने का अनुरोध किया जाता है, ताकि इस सीमावर्ती संवेदनशील राज्य में व्यापक जनहित में केएमएस 2025-26 के चावल की मिलिंग 30 जून, 2026 तक पूरी हो सके।
उन्होंने आगे कहा कि भारत सरकार ने राज्य में 10 वर्षीय गारंटी वाली पीईजी योजना के अंतर्गत कवर्ड गोदामों के निर्माण हेतु 60 लाख मीट्रिक टन क्षमता को मंजूरी दी है, ताकि चरणबद्ध तरीके से खुले भंडारण को समाप्त किया जा सके। भगवंत सिंह मान ने कहा कि खुली, प्रतिस्पर्धी और निष्पक्ष निविदा के माध्यम से खोजे जा रहे पीईजी गोदामों की दरों को स्वीकार किया जा सकता है या वैकल्पिक रूप से दी गई स्थिति से निपटने के लिए सीडब्ल्यूसी दरों के अलावा एक व्यवहार्य दर को बेंचमार्क के रूप में निर्धारित किया जा सकता है।
राज्य के लिए रबी 2025-26 के लिए डीएपी की व्यवस्था के मुद्दे पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अनुमानतः 35 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की खेती होगी, जिसके लिए लगभग 5.00 लाख मीट्रिक टन डीएपी उर्वरक की आवश्यकता होगी।
दुर्भाग्यवश, उन्होंने कहा कि इस संकटकालीन अवधि में फॉस्फेटिक उर्वरकों, विशेष रूप से डीएपी, की लगातार कमी अनुचित है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि गेहूं, आलू और अन्य रबी फसलों का अधिकतम उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए डीएपी एक आवश्यक सामग्री है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में चालू खरीफ सीजन के दौरान डीएपी की आपूर्ति पहले ही अपर्याप्त रही है, और जुलाई महीने को छोड़कर वास्तविक आपूर्ति आवंटित मात्रा से कम रही है।
उन्होंने कहा कि पंजाब भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) द्वारा प्रतिवर्ष खरीदे जाने वाले बफर स्टॉक का लगभग 50% उपलब्ध करा रहा है। अपर्याप्त उर्वरक के कारण गेहूं उत्पादन में किसी भी गिरावट का हमारी राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। इसलिए, भगवंत सिंह मान ने अगस्त से सितंबर के महीनों के दौरान पंजाब राज्य को डीएपी और अन्य फॉस्फेटिक उर्वरकों का अधिकतम आवंटन और समय पर आपूर्ति की मांग की।
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृह मंत्री से लेवल क्रॉसिंग संख्या 62-ए, शेरोन डिस्ट्रीब्यूटर, राजपुरा-बठिंडा लाइन, धुरी, जिला संगरूर (पंजाब) पर प्रस्तावित रेल ओवर ब्रिज (आरओबी) के लिए सामान्य व्यवस्था आरेख (जीएडी) की तत्काल मंजूरी के लिए हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया।
उन्होंने कहा कि आरओबी के निर्माण को एक महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजना के रूप में पहचाना गया है जो न केवल मौजूदा यातायात समस्याओं को कम करेगा बल्कि सड़क सुरक्षा में भी काफी सुधार करेगा, वाहनों के प्रवाह को सुगम बनाएगा और पंजाब के इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा। उन्होंने आगे कहा कि इस परियोजना के कार्यान्वयन के लिए आवश्यक 54 करोड़ रुपये की पूरी लागत पूरी तरह से पंजाब सरकार द्वारा वहन की जाएगी।
भगवंत सिंह मान ने कहा कि भारतीय रेलवे द्वारा सामान्य व्यवस्था आरेख (जीएडी) की लंबित मंजूरी के कारण परियोजना की समय पर प्रगति में बाधा आ रही है।
राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता किए बिना सीमा सुरक्षा बाड़ को जहाँ तक संभव हो, अंतर्राष्ट्रीय सीमा की ओर स्थानांतरित करने की मांग करते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय मानदंडों के अनुसार, निर्माण शून्य रेखा से 150 मीटर आगे किया जा सकता है।
हालाँकि, उन्होंने कहा कि पंजाब में कुछ स्थानों पर सीमा सुरक्षा बाड़ शून्य रेखा से काफी दूर है, इसलिए खेती की एक बड़ी ज़मीन अंतर्राष्ट्रीय सीमा और मौजूदा बाड़ के बीच स्थित है। परिणामस्वरूप, भगवंत सिंह मान ने कहा कि बड़ी संख्या में किसानों को इस ज़मीन पर खेती करने के लिए सीमा सुरक्षा बाड़ पार करनी पड़ती है, जिससे उन्हें रोज़ाना भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे बीएसएफ का कार्यभार भी बढ़ जाता है और सरकार को इन किसानों को पर्याप्त मुआवज़ा देना पड़ता है। इसे देखते हुए, उन्होंने अनुरोध किया कि बीएसएफ को निर्देश दिया जाए कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता किए बिना, जहाँ तक संभव हो, सीमा सुरक्षा बाड़ को अंतर्राष्ट्रीय सीमा की ओर स्थानांतरित करने की संभावना तलाशें। भगवंत सिंह मान ने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे को पहले ही भारत सरकार के समक्ष उठाया है, लेकिन मामला अभी भी लंबित है।
मेष: दिन शुभ रहेगा...