
इंटरनेशनल डेस्क : चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग का एक शानदार विचार पूरी दुनिया के लिए मिसाल बन गया है। उनका विचार ‘ स्वच्छ पानी और हरित पहाड़ अनमोल संपत्ति है ‘ पर्यावरण को बचाने और आर्थिक तरक्की को जोड़ने का रास्ता दिखा रहा है। ये बस एक नारा नहीं,बल्कि एक ऐसी सोच है जो चीन को हरा-भरा और समृद्ध बनाने में लगी है। 2013 में जिआंग्शी प्रांत की यात्रा के दौरान शी चिनफिंग ने ये बात कही थी और अब ये चीन की नीतियों का आधार बन चुका है।
क्या है ये सोच और कैसे शुरू हुई?
2013 में शी चिनफिंग ने कहा कि स्वच्छ पानी और हरित पहाड़ अनमोल संपत्ति है । सोने-चांदी से भी बढ़कर। ये बात 2018 में चीन के संविधान में शामिल हो गई जो दिखाता है कि ये कितना गंभीर मसला है। उनका कहना था कि अगर हम प्रकृति को नष्ट करेंगे तो पैसा भी बेकार हो जाएगा। इस सोच ने चीन को पर्यावरण और विकास को साथ ले जाने की राह दिखाई।
हरे विकास का कमाल
इस आइडिया ने चीन को हरे विकास की तरफ मोड़ा है। पहले औद्योगीकरण से प्रदूषण बहुत बढ़ गया था लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। चीनी राष्ट्रीय ऊर्जा प्रशासन के आंकडों की मानें तो 2020 तक चीन ने 70% से ज्यादा नई ऊर्जा प्रोजेक्ट्स सौर और पवन ऊर्जा पर लगाए, जिससे कार्बन उत्सर्जन में 12% की कमी आई। ग्लोबल फॉरेस्ट वॉच की रिपोर्ट के मुताबिक 2019 में चीन में 6।1 मिलियन हेक्टेयर नया जंगल विकसित किया गया और चीनी पर्यावरण मंत्रालय की मानें तो 2023 में 300 से ज्यादा शहरों में हवा की क्वालिटी बेहतर करने के लिए 150 बिलियन युआन यानी करीब 21 बिलियन डॉलर खर्च हुए। इससे न सिर्फ पर्यावरण साफ हुआ,बल्कि ग्रीन जॉब्स भी बढ़े।
पैसा कमाने और प्रकृति को बचाने में टक्कर नहीं
ये सोच टिकाऊ विकास का आधार बनी है। शी चिनफिंग का मंत्र है कि पैसा कमाने और प्रकृति को बचाने में टक्कर नहीं होनी चाहिए। चीन ने 2030 तक कार्बन पीक और 2060 तक कार्बन न्यूट्रल का लक्ष्य रखा है। चीनी पर्यावरण मंत्रालय की रिपोर्ट कहती है कि 2021 में येलो रिवर बेसिन को साफ करने के लिए 100 बिलियन युआन यानी करीब 14 बिलियन डॉलर लगाए गए, जिससे 20,000 से ज्यादा नौकरियां बनीं। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी की रिपोर्ट बताती है कि 2024 में 50,000 से ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन बनाए गए जो प्रदूषण कम करने में मदद कर रहे हैं।
दुनिया के लिए मिसाल
चीन का यह कदम पूरी दुनिया के लिए मिसाल बन गया है। यह सिद्धांत हमें सिखाता है कि जल्दी-जल्दी पैसा कमाने के चक्कर में प्रकृति को नुकसान न करें। शी चिनफिंग कहते हैं कि अगर हरा-भरा माहौल चला गया, तो दौलत का क्या फायदा? ये सोच न सिर्फ चीन बल्कि पूरी दुनिया के लिए मिसाल है। आज ग्लोबल वार्मिंग और प्रदूषण बड़ी समस्या हैं और ये आइडिया हमें सिखाता है कि देश मिलकर टिकाऊ भविष्य बनाएं। चीनी राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो के मुताबिक 2022 में चीन ने 25% अपनी बिजली साफ ऊर्जा से पैदा की जो इस दिशा में बड़ा कदम है।’ स्वच्छ पानी और हरित पहाड़ ‘का संदेश साफ है-प्रकृति को बचाओ, तभी विकास टिकाऊ होगा। ये सोच हमें प्रेरणा देती है कि पर्यावरण और अर्थव्यवस्था को साथ लेकर चलें।
(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग) (लेखक— डी के)
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