Last Updated: October 3, 2026

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इस खतरनाक बीमारी से जंग लड़ रहा 1 साल का युवांश, इंजेक्शन के लिए चाहिए 9 करोड़

October 3, 2025

इस खतरनाक बीमारी से जंग लड़ रहा 1 साल का युवांश, इंजेक्शन के लिए चाहिए 9 करोड़

हरियाणा डेस्क: हरियाणा पुलिस कांस्टेबल राजेश का बेटा युवांश विश्व की सबसे बड़ी बीमारी से जंग लड़ रहा है। युवांश को स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी की बीमारी है, जिससे शरीर की ग्रोथ नहीं होती। राजेश खुद पुलिस में और उनकी पत्नी फूड एंड सप्लाई विभाग में क्लर्क हैं। युवांश को जो इंजेक्शन लगना है। उसकी कीमत 14.50 करोड़ रुपये है, जो स्विटजरलैंड के जेनेवा से मिलेगा। अब कंपनी ने 9 करोड़ में यह इंजेक्शन देने की बात कही है, जिसमें से अभी भी 2 करोड़ रुपए कम हैं।

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राजनीतिक, पुलिस और सामाजिक संस्थाओं की मदद से अब तक 7 करोड़ रुपये इक्ट्ठे हो गए है लेकिन 2 करोड़ अभी बाकी हैं। युवांश इस 9 अक्तूबर को 1 साल का हो जाएगा। चिकित्सकों के अनुसार, बच्चे को दो साल के भीतर यह इंजेक्शन लगाना अति आवश्यक है। युवांश के पिता राजेश कुमार ने बताया कि जब बेटे की जिंदगी बचाने के लिए संघर्ष शुरू किया तब इंजेक्शन की कीमत 14.50 करोड़ रुपए थी। अपना सब कुछ बेचकर भी हम इतनी बड़ी रकम नहीं जुटा पाते लेकिन 7 करोड़ रुपये की फडिंग हो चुकी है। अब केवल 2 करोड़ रुपये की और आवश्यकता है। जैसे ही पैसे पूरे होते हैं तो जेनेवा से इंजेक्शन मंगवा लेंगे।

राजेश कुमार ने आगे बताया कि युवांश का जन्म 9 अक्टूबर 2024 को हुआ, जब वह दो महीने का था तो सामान्य बच्चों की तरह वह एक्टिवीटी नहीं कर रहा था, जिसके बाद डॉक्टरों को दिखाया गया तो उन्होंने बताया कि उनका बेटा लेट विकास करेगा। लेकिन जब छह माह बाद उसके बेटे की छाती में आवाज आने लगी तो उन्होंने दोबारा डॉक्टरों को दिखाया तो उन्होंने हायर सेंटर पीजीआई या एम्स में दिखाने की सलाह दी। इसके बाद मई महीने में हिसार के एक अन्य प्राइवेट अस्पताल में दिखाया तो डॉक्टर न टेस्ट करवाया। 18 मई को आई टेस्ट की रिपोर्ट में स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी टाइप-1 बीमारी मिली। तब डॉक्टर ने चंडीगढ़ पीजीआई या एम्स में ट्रीटमेंट शुरू करवाने की बात कही।

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इसके अलावा राजेश ने बताया कि 22 मई को वह पीजीआई में डॉक्टर के पास गाए, जहां उन्होंने बताया कि रीढ़ की हड्‌डी में न्यूरांस बनते हैं। इन न्यूरांस से ही सेल बनते हैं, जो शरीर की ग्रोथ करते हैं। स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी टाइप-1 बीमारी होने पर न्यूरांस नहीं बनते हैं। न्यूरांस नहीं बनने पर शरीर ग्रोथ नहीं करता है। शरीर सूख जाता है। यह इंजेक्शन 2 साल की उम्र तक लगवाना जरूरी है। हर रोज बीमारी बढ़ती है। इसलिए तत्कल इंजेक्शन लगवाना जरूरी है। इंजेक्शन आने के बाद दो से तीन महीने तक ट्रीटमेंट चलता रहेगा।

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