Last Updated: October 24, 2026

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H-1B वीजा पर फिर सख्ती की तैयारी में Donald Trump, जानें भारतीयों पर क्या होगा असर

October 10, 2025

H-1B वीजा पर फिर सख्ती की तैयारी में Donald Trump, जानें भारतीयों पर क्या होगा असर

वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर H-1B वीजा में बड़े बदलावों की तैयारी में हैं। पहले ही इस वीजा की फीस में भारी इजाफा कर चुके ट्रंप प्रशासन अब इसके नियमों और पात्रता शर्तों को और कड़ा करने की योजना बना रहा है। यदि ये प्रस्तावित बदलाव लागू होते हैं, तो इसका सीधा असर अमेरिका में नौकरी की आस लगाए लाखों भारतीय पेशेवरों और छात्रों पर पड़ेगा।

क्या है ट्रंप की नई रणनीति?

सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) ने H-1B वीजा नियमों में व्यापक संशोधन का प्रस्ताव अपने नियामक एजेंडे में शामिल किया है। इस प्रस्ताव में उन कंपनियों पर सख्ती की बात कही गई है जो वीजा नियमों का उल्लंघन करती हैं या गलत तरीके से वीजा लाभ उठाती हैं।

इसके अलावा, सीमा से छूट पाने वाले नियोक्ताओं की श्रेणी को भी सीमित किया जा सकता है। यानी जो संस्थाएं अभी तक सालाना वीजा सीमा से मुक्त थीं, उन्हें भी अब नए प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है।

अमेरिकी श्रमिकों के हित में कदम या विदेशी प्रतिभा पर रोक?

प्रस्ताव में कहा गया है कि इन बदलावों का मकसद H-1B वीजा कार्यक्रम की पारदर्शिता और “संस्थागत अखंडता” बनाए रखना है, ताकि अमेरिकी श्रमिकों के वेतन और कामकाजी स्थितियों की बेहतर रक्षा की जा सके। हालांकि आलोचकों का मानना है कि यह कदम वैश्विक प्रतिभा को अमेरिका आने से रोकने जैसा है खासकर भारतीय आईटी पेशेवरों और स्टेम (STEM) क्षेत्र के छात्रों के लिए।

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भारतीयों पर असर क्यों गहराएगा?

भारत लंबे समय से H-1B वीजा पाने वालों में शीर्ष पर रहा है। अमेरिका की तकनीकी कंपनियों में भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर, डेटा साइंटिस्ट और डेवलपर्स की भारी मांग रही है। लेकिन यदि नियम और शुल्क दोनों सख्त होते हैं, तो भारतीय युवाओं के लिए अमेरिका में नौकरी पाना और मुश्किल हो जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि ये प्रस्ताव सिर्फ नए आवेदकों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि पहले से H-1B वीजा पर काम कर रहे लोगों को भी प्रभावित कर सकते हैं जैसे वीजा नवीनीकरण, स्पॉन्सरशिप और ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया।

फीस में पहले ही हो चुका है बड़ा इजाफा

गौरतलब है कि ट्रंप प्रशासन ने पहले ही H-1B वीजा की आवेदन फीस को $100,000 तक बढ़ा दिया है जो कि अधिकांश मध्यम स्तर के नियोक्ताओं और स्टार्टअप्स के लिए यह एक भारी आर्थिक बोझ बन सकता है। इससे पहले भी ट्रंप कार्यकाल में ‘Buy American, Hire American’ नीति के तहत विदेशी श्रमिकों की नियुक्तियों पर कई प्रतिबंध लगाए गए थे।

क्या कहता है भविष्य?

ट्रंप 2024 के राष्ट्रपति चुनावों में एक बार फिर रिपब्लिकन पार्टी के प्रबल दावेदार हैं। यदि वे दोबारा सत्ता में आते हैं, तो H-1B और अन्य वीजा श्रेणियों पर और भी कड़े नियम लागू किए जा सकते हैं। ऐसे में भारतीय पेशेवरों और छात्रों को वैकल्पिक देशों जैसे कनाडा, ऑस्ट्रेलिया या यूरोप की ओर रुख करने पर मजबूर होना पड़ सकता है।

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