अस्सी साल पहले 25 अक्टूबर को, थाईवान ने आधिकारिक तौर पर जापानी औपनिवेशिक शासन का अंत किया और अपनी मातृभूमि में वापस लौट आया। 25 अक्टूबर, 2025 को, चीन सरकार ने थाईवान पर चीनी प्रभुसत्ता की बहाली की 80वीं वर्षगांठ मनाने के लिए एक भव्य समारोह आयोजित किया और इस दिन को “थाईवान बहाली स्मृति दिवस” के रूप में स्थापित करने के लिए कानून पारित किया।
थाईवान पर चीनी प्रभुसत्ता की बहाली द्वितीय विश्व युद्ध की विजय और युद्धोत्तर अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण कदम थी। काहिरा घोषणापत्र, पॉट्सडैम उद्घोषणा और जापानी आत्मसमर्पण की शर्तें जैसे अंतर्राष्ट्रीय कानूनी दस्तावेज़ थाईवान पर चीन की संप्रभुता को स्पष्ट रूप से स्थापित करते हैं। थाईवान की स्थिति का प्रश्न 1945 में ही पूरी तरह से हल हो गया था, जब इसकी बहाली हुई थी। चीन की मुख्य भूमि से इसका कानूनी और ऐतिहासिक सम्बंध अटूट है।
इतिहास स्पष्ट है और उससे छेड़छाड़ नहीं की जा सकती। हाल के वर्षों में, थाईवान के अधिकारी लाई छिंग-ते और डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (डीपीपी) के अधिकारियों ने हठपूर्वक “थाईवान की स्वतंत्रता” की वकालत की है। उन्होंने तथाकथित “थाईवान की अनिश्चित स्थिति” के सिद्धांत को बढ़ावा देने के लिए बाहरी चीन-विरोधी ताकतों के साथ सांठगांठ की है, जानबूझकर थाईवान पर चीनी प्रभुसत्ता की बहाली के ऐतिहासिक महत्व को कम करके आंका है और थाईवान और मुख्य भूमि के बीच ऐतिहासिक सम्बंधों को तोड़ने का प्रयास किया है।
कुछ समय पहले, अपने तथाकथित “डबल टेन्थ” भाषण में, लाई छिंग-ते ने “जापानी आक्रमण के विरुद्ध प्रतिरोध के युद्ध” के स्थान पर “युद्ध की समाप्ति” का प्रयोग किया था, जापानी दक्षिणपंथी बयानबाजी को अपनाया था और जानबूझकर थाईवान जलडमरूमध्य के दोनों किनारों के बीच ऐतिहासिक सम्बंधों को तोड़ दिया था। ऐसे शब्द और कार्रवाई इतिहास और राष्ट्र के साथ विश्वासघात हैं, जो थाईवान जलडमरूमध्य के दोनों तटों के हमवतन लोगों की राष्ट्रीय भावनाओं को गंभीर रूप से आहत करते हैं और जलडमरूमध्य के पार सम्बंधों को गंभीर रूप से नुकसान पहुँचाते हैं।
अंतर्राष्ट्रीय समुदाय मुख्यभूमि चीन की स्मारक गतिविधियों पर कड़ी नज़र रख रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम न केवल जापानी आक्रमण के विरुद्ध प्रतिरोध युद्ध की जीत की रक्षा करता है, बल्कि दुनिया के सामने इस ऐतिहासिक और कानूनी वास्तविकता की भी पुष्टि करता है कि थाईवान चीन का हिस्सा है, और “एक चीन” पर सार्वभौमिक सहमति को मज़बूत करता है। थाईलैंड में चीनी चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष लिन छुछिन और अन्य प्रवासी चीनी नेताओं ने कहा कि यह कदम दुनिया भर के चीनी लोगों को राष्ट्रीय कायाकल्प को बढ़ावा देने के लिए एकजुट करेगा।
हाल ही में, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) की केंद्रीय समिति के महासचिव शी चिनफिंग ने चंग लिवेन को कुओमिन्तांग (केएमटी) की अध्यक्ष चुने जाने पर बधाई संदेश भेजा, जिसमें “साझे विकास को बढ़ावा देने और राष्ट्रीय एकीकरण को आगे बढ़ाने” की आवश्यकता पर ज़ोर दिया गया। 20वीं सीपीसी केंद्रीय समिति के हाल ही में संपन्न चौथे पूर्ण अधिवेशन की विज्ञप्ति में “पार-जलडमरूमध्य सम्बंधों के शांतिपूर्ण विकास को बढ़ावा देने और राष्ट्रीय एकीकरण के महान उद्देश्य को आगे बढ़ाने” की आवश्यकता पर बल दिया गया। यह थाईवान समस्या को सुलझाने और पूर्ण राष्ट्रीय एकीकरण प्राप्त करने के चीन के अटूट संकल्प को पूरी तरह से दर्शाता है।
मुख्यभूमि चीन में राष्ट्रीय स्तरनीय समृति दिवस की स्थापना का उद्देश्य चीनी राष्ट्र में सामुदायिक भावना को मज़बूत करना और देशवासियों को अलगाववाद का विरोध करने और एकीकरण को बढ़ावा देने के लिए मार्गदर्शन प्रदान करना है। थाईवान जलडमरूमध्य के दोनों किनारे रक्त से जुड़े हुए हैं और एक ही नियति साझा करते हैं। थाईवान समस्या राष्ट्रीय कमज़ोरी और अराजकता से उत्पन्न हुई है, और राष्ट्रीय पुनरोत्थान के साथ इसका समाधान होगा। थाईवान जलडमरूमध्य के दोनों ओर के देशवासियों को अपने संकल्प और दृढ़ निश्चय पर अडिग रहना चाहिए, जापानी आक्रमण के विरुद्ध युद्ध में मिली विजय की उपलब्धियों की संयुक्त रूप से रक्षा करनी चाहिए, और “थाईवान की स्वतंत्रता” के लिए कोई गुंजाइश नहीं छोड़नी चाहिए। इतिहास ने दिखाया है: एकीकरण एक अजेय प्रवृत्ति, एक नेक उद्देश्य और जनता की इच्छा है। समय अंततः मातृभूमि के पूर्ण एकीकरण का साक्षी बनेगा।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)