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शीत्सांग ग्रामीण पुनर्जीवन उत्पाद प्रदर्शन केंद्र ल्हासा में शुरू

November 20, 2025

शीत्सांग ग्रामीण पुनर्जीवन उत्पाद प्रदर्शन केंद्र ल्हासा में शुरू

शीत्सांग ग्रामीण पुनर्जीवन उत्पाद प्रदर्शन केंद्र शुक्रवार को दक्षिण पश्चिम चीन के शीत्सांग (तिब्बत) स्वायत्त प्रदेश की राजधानी ल्हासा में शुरू किया गया। इस केंद्र का उद्देश्य स्थानीय विशिष्ट संसाधनों के लाभ का उपयोग करते हुए ग्रामीण पुनर्जीवन और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को गति देना है। यह प्रदर्शन केंद्र शीत्सांग के सभी 74 जिलों के उच्च गुणवत्ता वाले संसाधनों को एक साथ लाता है, जहाँ सात शहरों और प्रिफेक्चरों के विशेष उत्पाद जैसे याक मांस, जौ उत्पाद, और तिब्बती थांगखा चित्र आदि की बिक्री की जाएगी। इसमें कृषि और पशु उत्पाद, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक पर्यटन सामान जैसी श्रेणियाँ शामिल हैं।

केंद्र ने “ऑफलाइन अनुभव + ऑनलाइन बिक्री” मॉडल अपनाया है, जिससे विशेष उत्पाद प्रदर्शनी और बिक्री को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, गैर-सांस्कृतिक विरासत अनुभव क्षेत्र और तिब्बती संस्कृति गलियारा भी स्थापित किया गया है, जहाँ पर्यटक थांगखा चित्र, तिब्बती इत्र निर्माण आदि पारंपरिक कौशलों का सीधा अनुभव कर सकेंगे। केंद्र के प्रमुख च्या चिंगफेंग ने कहा कि पर्यटन विभाग के साथ गहन सहयोग से, केंद्र पर्यटन परामर्श और मार्ग प्रचार जैसी सेवाएं प्रदान करेगा।

घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्मों के साथ साझेदारी कर, सेलिब्रिटी मार्केटिंग और त्वरित खुदरा जैसे नए मॉडल पेश किए जाएंगे, जिससे “क्षेत्रीय लघु चक्र और बाह्य बड़ा चक्र” की बिक्री प्रणाली विकसित हो सके। उन्होंने यह भी बताया कि सीधे खरीद चैनलों के माध्यम से किसान और पशुपालक सहकारी समितियों से जुड़कर, उत्पाद ट्रेसिंग प्रणाली स्थापित की गई है। साथ ही, “तिब्बत उपहार” सांस्कृतिक रचनात्मक श्रृंखला विकसित की गई है, जिससे पठारीय विशेष उत्पादों के मूल्य में प्रभावी ढंग से वृद्धि हुई है।

बताया जाता है कि इस परियोजना के पहले वर्ष में 150 से अधिक संबंधित व्यवसायियों को शामिल किए जाने और 1,500 से अधिक उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री का लक्ष्य है, जबकि वार्षिक बिक्री 1.4 करोड़ युआन तक पहुँचने का अनुमान है। यह न केवल किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त करेगा, बल्कि ल्हासा में एक नए सांस्कृतिक पर्यटन स्थल के रूप में भी उभरेगा, जिससे ग्रामीण पुनर्जीवन और सांस्कृतिक विरासत संरक्षण दोनों को बल मिलेगा। 

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(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

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