
नई दिल्ली: सोने की रिकॉर्ड तोड़ कीमतों के दौर में निवेशक अब अपने निष्क्रिय पड़े सोने से भी नियमित आय बनाने लगे हैं। गोल्ड बार हो, ज्वेलरी हो या डिजिटल गोल्ड इसे बाजार में लीज पर देकर लोग सालाना 1% से लेकर 7% तक का रिटर्न कमा रहे हैं। यही कारण है कि हाई-नेटवर्थ व्यक्तियों (HNIs) से लेकर कई बड़े इन्वेस्टमेंट फंड अब गोल्ड को तिजोरी में रखने के बजाय गोल्ड लीजिंग मॉडल अपना रहे हैं।

क्या है गोल्ड लीजिंग?
गोल्ड लीजिंग वह मॉडल है जिसमें सोने का मालिक अपने गोल्ड को जौहरियों, रिफाइनर्स या विदेशी फाइनेंशियल संस्थानों को एक निश्चित अवधि के लिए उधार देता है।
यह अवधि कुछ सप्ताह से लेकर कई महीनों तक हो सकती है।
बदले में गोल्ड ओनर को ब्याज, गोल्ड या नकद में भुगतान मिलता है।
खास बात यह कि गोल्ड का स्वामित्व पूरे समय निवेशक के पास ही रहता है, यानी सोना सिर्फ अस्थायी रूप से उपयोग के लिए दिया जाता है।
मांग के आधार पर लीजिंग दरें बदलती रहती हैं। सामान्य समय में रिटर्न 1–2% होता है, जबकि अंतरराष्ट्रीय मांग बढ़ने पर यह 5–6% या उससे अधिक भी पहुंच सकता है।
गोल्ड लीजिंग होती कहां है?
गोल्ड लीजिंग का सबसे बड़ा नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय मार्केट में है, जहां London OTC, LBMA और COMEX जैसे प्लेटफॉर्म गोल्ड लेंडिंग और लीजिंग के केंद्र हैं। अब यही मॉडल भारत में भी तेजी से विस्तार कर रहा है।
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भारत में बढ़ रहा है गोल्ड लीजिंग का ट्रेंड
भारत में कई ज्वैलर्स और रिफाइनरी कंपनियां गोल्ड लीजिंग का इस्तेमाल अपनी इन्वेंटरी जरूरतें पूरी करने के लिए करने लगी हैं। साथ ही निवेशकों के लिए भी कई विकल्प बढ़ रहे हैं:
RSBL और Gullak जैसे डिजिटल गोल्ड प्लेटफॉर्म
बैंकों की Gold Monetisation Scheme (GMS)
इन माध्यमों के जरिए निवेशक सुरक्षित तरीके से अपना सोना लीज पर देकर नियमित आय प्राप्त कर सकते हैं।