Last Updated: November 3, 2026

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हिमाचल में पंचायत चुनाव का काम रुका, मतदाता सूची का डाटा फिर अटका

November 29, 2025

हिमाचल में पंचायत चुनाव का काम रुका, मतदाता सूची का डाटा फिर अटका

Himachal Panchayat Elections: पंचायतों के पुनर्गठन और पुनर्सीमांकन संबंधी कैबिनेट के हालिया फैसले के बाद जिला निर्वाचन अधिकारियों ने एक बार फिर फील्ड गतिविधियों से लेकर मतदाता सूची की प्रिंटिंग तक का पूरा डाटा प्रोसेस रोक दिया है। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी निर्देशों के अनुरूप सरकार ने पहले जिला उपायुक्तों को ठेकेदारों को मतदाता सूची छपाई हेतु आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने को कहा था। इसी सिलसिले में पंचायतीराज सचिव की उपायुक्तों के साथ वर्चुअल बैठक भी आयोजित हुई थी, लेकिन अब छपाई के लिए डाटा उपलब्ध करवाना दोबारा बंद कर दिया गया है। पुनर्सीमांकन की प्रक्रिया शुरू होने के संकेतों के बीच यह अनुमान लगाया जा रहा है कि मतदाता सूचियों को संभवतः फिर से तैयार करना पड़ सकता है।

प्रिंटिंग टेंडर जारी, पर प्रक्रिया अधर में

मुद्रण एवं लेखन सामग्री विभाग पहले ही मतदाता सूचियों की छपाई के लिए टेंडर जारी कर चुका था। नियमों के अनुसार रोस्टर जारी होने से पहले इन सूचियों को पंचायत स्तर तक पहुंचाना जरूरी है, जिसके तहत प्रत्येक वार्ड के लिए 20-20 प्रतियां उपलब्ध करवाई जानी थीं। मगर पुनर्गठन की नई स्थिति बनते ही जिला निर्वाचन अधिकारी संशय में हैं कि आगे की दिशा क्या हो। एक ओर सरकार ने प्रदेश में डिजास्टर एक्ट लागू कर रखा है, वहीं दूसरी ओर चुनाव आयोग पंचायत चुनाव की तैयारियों मतदाता सूची, बैलेट पेपर और अन्य सामग्री को बिना देरी पूरा करने पर जोर दे रहा था।

पुनर्सीमांकन से चुनावी तैयारियों पर सवाल

सरकार द्वारा पंचायतों के पुनर्गठन और पुनर्सीमांकन का निर्णय लेने के बाद चुनावी तैयारियों से जुड़ी लगभग हर गतिविधि पर अनिश्चितता गहरा गई है। आयोग फिलहाल पुनर्गठन पर लगी रोक हटाने के पक्ष में नहीं है। ऐसी स्थिति में सरकार ने मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट (एमसीसी) के क्लॉज 12.1 को हटाने का आग्रह किया है, लेकिन आयोग का तर्क है कि यह प्रावधान कानून के अनुरूप लागू किया गया है। परिणामस्वरूप पूरा मामला कोर्ट में स्पष्ट होने की संभावना जताई जा रही है।

प्रदेश में पंचायत चुनाव कराना सरकार की सक्रिय भागीदारी और प्रशासनिक सहयोग के बिना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। आयोग भी इस व्यावहारिक कठिनाई को स्वीकार कर चुका है, क्योंकि चुनावी ड्यूटी का बड़ा हिस्सा शिक्षा विभाग के कर्मचारियों और शिक्षकों के भरोसे ही पूरा होता है, जबकि वर्तमान में राज्य डिजास्टर एक्ट के तहत काम कर रहा है।

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