
नई दिल्ली: मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे पर विपक्ष के मौजूदा तेवरों को देखते हुए संसद के शीतकालीन सत्र में भी इसके छाए रहने की संभावना है। इस सत्र में विपक्ष दिल्ली कार विस्फोट, राजधानी दिल्ली में प्रदूषण की समस्या और नए श्रम कानूनों जैसे मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाएगा। विपक्ष और सरकार ने सोमवार से शुरू हो रहे संक्षिप्त सत्र के लिए कमर कस ली है और दोनों पक्ष अपनी-अपनी रणनीति बनाने में जुटे हैं।
शीतकालीन सत्र 1 दिसम्बर से 19 दिसम्बर तक चलेगा और इस दौरान केवल 15 बैठकें होंगी। विपक्ष सत्र को संक्षिप्त रखे जाने पर भी सरकार पर हमलावर है। सरकार ने जहां इस सत्र में कॉरपोरेट कानून, परमाणु ऊर्जा और शिक्षा सहित 10 विधेयकों को पारित कराने का एजैंडा तैयार किया है वहीं विपक्ष एसआईआर, ऑपरेशन सिंदूर को लेकर अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लगातार किये जा रहे दावों, चीन के साथ संबंधों, आतंकवाद, प्रदूषण और अन्य मुद्दों पर सरकार को कठघरे में खड़ा करने की तैयारी में है।
कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, द्रमुक, समाजवादी पार्टी और कुछ अन्य दलों ने एसआईआर के मुद्दे पर सरकार और चुनाव आयोग के बीच सांठ-गांठ का आरोप लगाते हुए इसे संसद में जोर-शोर से उठाने का संकेत दिया है। एसआईआर के मुद्दे पर तृणमूल के एक प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग से मुलाकात भी की है। विपक्ष एसआईआर के दौरान बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) पर दबाव का मुद्दा भी उठा रहा है।
सत्र के दौरान सरकार के एजैंडे में 12 विधेयक विचार के लिए सूचीबद्ध हैं जिनमें से दो जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) विधेयक, 2025 और दिवालिया एवं दिवालियापन संहिता (संशोधन) विधेयक, 2025 पहले से ही लोकसभा की प्रवर समिति के पास हैं। सरकार वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अतिरिक्त अनुदानों की पहली मांगों को भी सदन में चर्चा और मतदान के लिए रखेगी। सत्र के दौरान पेश किए जाने वाले विधेयकों में कॉरपोरेट कानून (संशोधन) विधेयक 2025, सिक्योरिटीज मार्केट्स कोड विधेयक 2025 , बीमा कानून (संशोधन) विधेयक 2025, मणिपुर जीएसटी (संशोधन) विधेयक 2025, राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा आयोग विधेयक 2025 , परमाणु ऊर्जा विधेयक 2025, राष्ट्रीय राजमार्ग (संशोधन) विधेयक, 2025, निरसन एवं संशोधन विधेयक 2025, मध्यस्थता एवं सुलह (संशोधन) विधेयक 2025 शामिल है।
मेष: दिन शुभ रहेगा...