Last Updated: November 3, 2026

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हिमाचल भूकंप के मामले में अति संवेदनशील जोन 6 में शामिल

December 2, 2025

हिमाचल भूकंप के मामले में अति संवेदनशील जोन 6 में शामिल

शिमला: देश का नया भूकंप मैप जारी हो गया है। इस मैप के मुताबिक समूचा हिमालयी क्षेत्र जिसमें हिमाचल भी शामिल है को अति संवेदनशील वाले जोन 6 में शामिल किया गया है। नया भूकंप मैप ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टेंडर्ड ने जारी किया है। सनद रहे कि इससे पहले हिमाचल भूकंप के मामले में संवेदनशील जोन 4 और 5 में शामिल था। बीआईएस के मुताबिक पुराने भूकंप मैप में शामिल ऐतिहासिक आंकड़ों, नुकसान के सर्वे और टैक्टोनिक स्ट्रर के आधार पर जोन तय किए गए थे, लेकिन नया मैप आधुनिक विज्ञानिक तकनीक के विशखेषण के आधार पर तैयार किया गया है।

इसमें यह देखा गया है कि किस क्षेत्र में कितनी जनसंख्या रहती है, कौन-कौन सी महत्वपूर्ण इमारतें हैं और भूकंप के आने की संभावना सबसे ज्यादा कहां-कहां पर है। नए मैप के जारी होने के बाद अब प्रदेश सरकार को भी भवन निर्माण के नियमों में बदलाव करने की जरूरत महसूस की जा रही है। बहुत अधिक ऊंचाई की इमारतों को बनाने की अनुमति देने से सरकारों को गुरेज करना होगा। साथ ही प्रत्येक भवन के बीच नियमों के अनुसार सैट बैक छोड़ना अनिवार्य किए जाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। दरअसल हिमाचल पहले भी कांगड़ा भूकंप की त्रसदी ङोल चुका है।

एक शताब्दी पहले आए कांगड़ा भूकंप में करीब-करीब 20 हजार लोगों की जान चली गई थी। कांगड़ा के बाद किन्नौर व प्रदेश के कई अन्य जिलों में भूकंप ने तबाही मचाई। इन तबाहियों के बावजूद प्रदेश में भवन निर्माण के कायदे कानून को धत्ता दिखाते हुए करीब-करीब 30 हजार अवैध निर्माण हुए हैं। इन अवैध निर्माणों के चलते हजारों जानें जोखिम में हैं। भूकंप आने की स्थिति में अवैध निर्माणों वाले इलाकों में राहत व बचाव कार्य चलाना भी मुश्किल होगा।

इन इलाकों में दमकल वाहनों के साथ-साथ रोगी वाहन पहुंचाना भी मुश्किल है। मगर अब जोन 6 में शामिल किए जाने के बाद हिमाचल सरकार को अत्यधिक सतर्क रहने की जरूरत महसूस की जा रही है। साथ ही भवन निर्माण के नियमों को बदलकर इन्हें कड़ाई से लागू करना भी अनिवार्य माना जा रहा है अन्यथा रिक्टर स्केल पर 6 की तीव्रता से अधिक का कोई भी भूकंप हिमाचल जैसे संवेदनशील राज्य में तबाही की वजह बन सकता है।

गौरतलब है कि हिमाचल पहले ही प्राकृतिक आपदा की मार ङोल रहा है। 2023 और 2025 में करीब 500 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। इनमें दुर्घटना के मामले भी शामिल हैं। कई मौतें नियमों को ताक पर रखकर बनाए गए भवनों के जमींदोज होने से हुईं लिहाजा अब बीआईएस के नए भूकंप मानचित्र के जारी होने के बाद सरकार को सतर्क होने की दरकार है।

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