Last Updated: October 5, 2026

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यूनियन नेताओं की रिहाई के बाद ही चलेंगी रोडवेज की बसें

December 2, 2025

यूनियन नेताओं की रिहाई के बाद ही चलेंगी रोडवेज की बसें

अमृतसर: पंजाब रोडवेज पनबस/पीआरटीसी नेताओं की रिहाई के बाद ही रोडवेज की बसें डीपू से बाहर निकल कर सड़क पर आएंगी। यूनियन के प्रदेश कैशियर बलजीत सिंह और पंजाब रोडवेज अमृतसर-1 डीपू के प्रधान केवल सिंह ने यह बात सोमवार को वर्कशाप में रोष प्रदर्शन के दौरान कही। हालांकि पंजाब सरकार ने रोडवेज के बर्खास्त मुलाजिमों को वापस सेवा में लेने संबंधी पत्र जारी कर दिए, लेकिन इसमें भी शोध की जरुरत है, जिसके बारे सरकार को बता दिया गया है।

यूनियन नेताओं ने कहा जब तक यूनियन के नेताओं की रिहाई नहीं होती और उनके पास नहीं पहुंचते तब तक बसें नहीं चलेंगी। ट्रांसपोर्ट मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर के साथ हुई बैठक में यूनियन के नेताओं को रिहा किए जाने के साथ ही उनपर दर्ज एफआईआर रद करने की बात भी यूनियन की मान ली। वहीं बर्खास्त मुलाजिमों को वापस नौकरी पर लेने की मानी और इसे लेकर सरकार ने पत्र भी जारी कर दिए, जो कर्मचारियों को मिल चुके हैं। उन्होंने कहा कि इस पत्र में एक लाइन लिखनी बाकी है, जिसमें बिना शर्त लिखा जाएगा। उन्होंने कहा कि इसे लेकर सरकार को सूचित कर दिया गया है।

यूनियन के नेता बलजीत सिंह, हीरा सिंह और यूनियन के चेयरमैन गुरविंदर सिंह ने कहा कि सरकार ने यूनियन नेताओं की रिहाई की बात तो मानी है मगर अभी तक उनके नेताओं को छोड़ा नहीं गया। वहीं सरकार ने बसें चलाने संबंधी भी पत्र जारी किया मगर यह तब तक संभव नहीं जब तक उनके नेताओं को छोड़ा नहीं जाता। यूनियन की तरफ से सोमवार को भी पंजाब रोडवेज की वर्कशाप में धरना दिया गया और रोष प्रदर्शन किया गया। यूनियन के वर्कर देर सायं तक रोडवेज परिसर में धरने पर बैठे रहे। इस अवसर पर पंजाब रोडवेज अमृतसर-1 के कैशियर प्रेम सिंह, अमृतसर-2 के कैशियर जोध सिंह ने भी अपने साथियों को संबोधन करते हुए कहा कि जब तक सरकार उनकी मांगें नहीं मानी जाती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

शहीद मदन लाल ढींगरा अंतराज्जीय बस अड्डे से आज भी प्राइवेट बसों का आना-जाना जारी रहा। हालांकि इस दौरान पंजाब रोडवेज की भी कुछ बसें चलें। यह बसें रोडवेज के रैगुलर मुलाजिमों की तरफ से चलाई गई। क्योंकि रोडवेज की बहुत कम सरकारी बसें सड़कों पर निकली, तो महिलाओं के लिए सफर करना मुश्किल रहा। क्योंकि सरकारी बसों में महिलाओं को मुफ्त सफर की सुविधा है जबकि प्राइवेट बसों में उन्हें अन्य यात्रियों की तरह टिकट लेकर सफर करना पड़ा।

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