रुड़की : 2013 में केदारनाथ में आई विनाशकारी बाढ़ ने हजारों लोगों की जान ले ली थी, जबकि सैकड़ों लापता हो गए थे। उन लापता व्यक्तियों में से एक शिवम था। कई दिनों तक उसका कोई पता नहीं चला, और परिवार ने उन्हें मृत मानकर उसका अंतिम संस्कार कर दिया। लेकिन, समय ने इस दुखद कहानी में एक अनोखा मोड़ ला दिया। शिवम कई सालों बाद महाराष्ट्र के संभाजीनगर में ज़िंदा पाया गया। खुद शिवम को भी याद नहीं कि वह वहां कैसे पहुंचा।
अदालत और मानसिक स्वास्थ्य की भूमिका
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, 2021 में संभाजीनगर के एक मंदिर में चोरी हुई थी और कुछ लुटेरों ने शिवम का नाम इस मामले में घसीट दिया। अदालत में पेश किए जाने पर जज ने उनकी मानसिक स्थिति को देखते हुए उन्हें पुणे के रीजनल मेंटल हॉस्पिटल (RMH) में भर्ती करने का आदेश दिया।
छोटी-सी जानकारी ने खोले परिवार के दरवाज़े
रुड़की के गवर्नमेंट मेंटल हॉस्पिटल में शिवम के स्कूल ‘प्रेम विद्यालय’ से जुड़ी जानकारी मिली। यह एक ऐसा सुराग साबित हुआ जिसने उनकी तलाश को आसान बना दिया। RMH की समाज सेवा अधीक्षक रोहिणी भोसले के मुताबिक, शिवम से पहचान करना आसान नहीं था। उनकी पहाड़ी बोली और पोलियो के कारण चलने में कठिनाई उन्हें अलग पहचान देती थी।
2023 में शिवम ने अचानक अपने स्कूल का नाम बताया, जिससे रुड़की थाने के माध्यम से उनके परिवार तक पहुंच संभव हुआ। अदालत ने भी स्पष्ट किया कि शिवम का चोरी से कोई संबंध नहीं है और RMH ने उन्हें छुट्टी दे दी। इसके बाद 5 नवंबर को 55 वर्षीय शिवम आखिरकार अपने परिवार से मिल पाए।
डिसऑर्गेनाइज़्ड सिज़ोफ्रेनिया की चुनौती
शिवम डिसऑर्गेनाइज़्ड सिज़ोफ्रेनिया से पीड़ित हैं। यह मानसिक बीमारी व्यक्ति की सोचने और बोलने की क्षमता, साथ ही रोज़मर्रा के कामकाज को प्रभावित करती है। उनकी हालत को देखते हुए परिवार ने फिलहाल इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं करने का निर्णय लिया है।
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