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पंजाब नगर निगम की प्रॉपर्टी मालिकों पर सख्ती: टैक्स डिफॉल्टरों को भेजा नोटिस

December 8, 2025

पंजाब नगर निगम की प्रॉपर्टी मालिकों पर सख्ती: टैक्स डिफॉल्टरों को भेजा नोटिस

पंजाब डेस्क: चंडीगढ़ नगर निगम ने प्रॉपर्टी टैक्स डिफॉल्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। निगम ने प्राइवेट प्रॉपर्टी मालिकों पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हुए 20,000 रुपये से अधिक टैक्स बकाया वाले डिफॉल्टरों को प्रॉपर्टी अटैचमेंट नोटिस भेजना शुरू कर दिया है।

नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि पहले 50,000 रुपये और 30,000 रुपये से अधिक बकाया वाले टैक्स डिफॉल्टरों को नोटिस जारी किए गए थे। अब तीसरी श्रेणी में 20,000 रुपये से अधिक बकाया वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है।

पानी के कनेक्शन पर भी सख्ती

नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय में टैक्स जमा न कराने पर प्रॉपर्टी के पानी के कनेक्शन काटने के आदेश दिए जाएंगे। इसके साथ ही, जरूरत पड़ने पर प्रॉपर्टी को सीज या बेचने का भी अधिकार निगम के पास है। पंजाब म्युनिसिपल कॉरपोरेशन एक्ट 1994 के तहत यह कार्रवाई वैध है।

कॉर्पोरेशन कमिश्नर अमित कुमार ने सभी स्तर के टैक्स डिफॉल्टरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। वर्तमान में नगर निगम पर कुल ₹170 करोड़ से अधिक का बकाया है, जिसमें से करीब ₹100 करोड़ मामले कोर्ट में पेंडिंग हैं।

इस साल टैक्स कलेक्शन में रिकॉर्ड

इस वित्तीय वर्ष में अब तक नगर निगम ने प्रॉपर्टी टैक्स के रूप में लगभग ₹82 करोड़ वसूल किए हैं, जो पिछले वर्षों की तुलना में सबसे अधिक है। पिछले पूरे वित्तीय वर्ष में केवल ₹59 करोड़ का कलेक्शन हुआ था। अधिकारियों का मानना है कि वर्ष के अंत तक यह राशि ₹100 करोड़ को पार कर सकती है।

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बड़े डिफॉल्टर और रिकवरी की कोशिशें

नगर निगम के रिकॉर्ड के अनुसार सबसे बड़ा डिफॉल्टर पंजाब यूनिवर्सिटी है, जिस पर लगभग ₹60 करोड़ का बकाया है। इसके बाद IT पार्क (₹45 करोड़), PGI (23 करोड़, जिसमें ₹11 करोड़ हाल ही में जमा हुए), UT इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट (₹16 करोड़), गोल्फ क्लब (₹12 करोड़) और Panjab Engineering College (PEC) (10 करोड़) शामिल हैं। हाल ही में रेलवे स्टेशन ने ₹2.98 करोड़ जमा किए हैं।

पुराने बड़े डिफॉल्टरों से वसूली को भी जोर दिया जा रहा है। PGI ने ₹11 करोड़ का भुगतान किया है, जबकि रेलवे विभाग ने ₹3 करोड़ जमा किए हैं। निगम अधिकारियों का कहना है कि अधिकांश मामलों का निपटारा वन टाइम सेटलमेंट (OTS) स्कीम के माध्यम से होने की उम्मीद है। नगर निगम की यह सख्ती प्रॉपर्टी टैक्स कलेक्शन को बढ़ाने और बकाया राशि वसूलने के उद्देश्य से की गई है।

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