करनाल। प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्थिति में पहुंचने के बाद शहर में शुक्रवार से ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (ग्रेप) का सबसे सख्त चरण लागू कर दिया गया। इसके चलते सरकारी स्तर पर चल रहे लगभग सभी निर्माण और विकास कार्यों को रोकना पड़ा है। इस फैसले से करनाल में करीब 2000 करोड़ रुपये की योजनाएं अस्थायी रूप से ठहर गई हैं।
ग्रेप-4 के तहत धूल और मिट्टी से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए गए हैं। इसी वजह से बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है। शहर में निर्माणाधीन टी-फ्लाईओवर, रिंग रोड और यूनिटी मॉल जैसे अहम प्रोजेक्ट्स पर काम फिलहाल बंद कर दिया गया है। इन योजनाओं पर काम कर रही निर्माण एजेंसियों को साफ तौर पर निर्देश दिए गए हैं कि प्रतिबंध की अवधि में किसी भी तरह की गतिविधि न की जाए।
नगर निगम के कामकाज पर भी इसका सीधा असर दिखाई दे रहा है। निगम के अधीन विभिन्न वार्डों में चल रहे विकास कार्य रुक गए हैं। इनमें सड़कों का सुधार, नालियों की मरम्मत, इंटरलॉकिंग टाइल्स बिछाने, सीवर लाइन और पेयजल पाइपलाइन से जुड़े काम शामिल हैं। अचानक काम बंद होने से कई इलाकों में लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ सकता है।
ग्रेप-4 को आपात स्थिति में लागू किया जाता है और यह पहले के सभी चरणों से अधिक सख्त माना जाता है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग द्वारा लागू किए जाने वाले इस चरण में सभी प्रकार के निर्माण और तोड़फोड़ कार्यों पर पूर्ण प्रतिबंध रहता है, चाहे वह सड़क, फ्लाईओवर, बिजली या पाइपलाइन से जुड़ा प्रोजेक्ट ही क्यों न हो।
हालांकि सरकारी परियोजनाओं पर पूरी तरह ब्रेक लग गया है, लेकिन निजी निर्माण को लेकर तस्वीर उतनी स्पष्ट नहीं है। शहर के कुछ हिस्सों में अब भी निजी भवनों का निर्माण जारी है। एचएसआईआईडीसी क्षेत्र के कई सेक्टरों के आसपास चल रहे काम प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एसडीओ रणदीप सिंधू ने बताया कि ग्रेप-4 के तहत लगाए गए प्रतिबंध स्थायी नहीं हैं। जैसे ही वायु गुणवत्ता में सुधार दर्ज किया जाएगा, वैसे ही विकास कार्यों को दोबारा शुरू करने की अनुमति दी जाएगी। फिलहाल प्रशासन का पूरा फोकस प्रदूषण को नियंत्रित करने और लोगों को साफ हवा उपलब्ध कराने पर है।