नेशनल डेस्क। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत इस समय पश्चिम बंगाल के चार दिवसीय दौरे पर हैं। उत्तर बंगाल में कार्यक्रमों के बाद वे कोलकाता पहुंचे। कोलकाता के साइंस सिटी सभागार में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने लोगों को संबोधित किया।
‘संघ को तुलना से नहीं समझा जा सकता‘
अपने भाषण में मोहन भागवत ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति संघ को समझना चाहता है, तो उसकी तुलना किसी और संगठन से नहीं करनी चाहिए। ऐसा करने से गलतफहमियां पैदा होती हैं। उन्होंने साफ कहा कि संघ कोई साधारण सेवा संगठन नहीं है। अगर कोई इसे केवल सेवा संस्था समझता है, तो वह संघ की असली सोच को नहीं समझ पाएगा।
कोलकाता व्याख्यानमाला द्वितीय सत्र – 100 वर्ष की संघ यात्रा ‘नए क्षितिज https://t.co/xfpeIzpore
— RSS (@RSSorg) December 21, 2025
संघ को भाजपा से जोड़ना बड़ी भूल
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि कई लोग संघ को भाजपा के नजरिए से देखने की कोशिश करते हैं, जो पूरी तरह गलत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ की स्थापना किसी राजनीतिक पार्टी के लिए नहीं हुई थी।
भारत सिर्फ देश नहीं, एक संस्कृति है
मोहन भागवत ने कहा कि भारत केवल जमीन का एक टुकड़ा या एक देश नहीं है, बल्कि यह एक विशेष संस्कृति, परंपरा और जीवन शैली का नाम है। संघ का उद्देश्य इन मूल्यों की रक्षा करना और उन्हें आगे बढ़ाना है। संघ चाहता है कि भारत अपनी सांस्कृतिक ताकत के बल पर फिर से विश्व गुरु बने।
संघ का जन्म राजनीति के लिए नहीं हुआ
भागवत ने दो टूक कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का गठन किसी राजनीतिक मकसद, विरोध या प्रतिस्पर्धा के लिए नहीं हुआ। संघ पूरी तरह से हिंदू समाज के संगठन, विकास और सुरक्षा के लिए काम करता है।
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इतिहास से समझाया संघ का रोल
संघ की भूमिका को समझाने के लिए मोहन भागवत ने इतिहास का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि सुभाष चंद्र बोस के निधन के बाद अंग्रेजों के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष जरूर थम गया था, लेकिन राजा राम मोहन राय के समय से शुरू हुई समाज सुधार की प्रक्रिया लगातार चलती रही। उन्होंने इस प्रक्रिया की तुलना समुद्र के बीच मौजूद एक ऐसे द्वीप से की, जो समय के साथ और मजबूत होता गया।
‘समाज को मजबूत बनाना सबसे जरूरी‘
आरएसएस प्रमुख ने अपने भाषण में समाज की एकता और मजबूती पर खास जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत की विरासत बहुत महान है और अब समय आ गया है कि देश खुद को वैश्विक नेतृत्व के लिए तैयार करे।
अतीत से सीख लेकर भविष्य की तैयारी
भागवत ने कहा कि अतीत में भारत अंग्रेजों से युद्ध हार गया था, लेकिन अब जरूरत है कि समाज को संगठित और शक्तिशाली बनाया जाए। उन्होंने कहा कि मजबूत समाज ही मजबूत राष्ट्र की नींव होता है।
संघ की 100 साल की यात्रा का संदेश
पूरा भाषण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100 वर्षों की यात्रा पर केंद्रित रहा। उन्होंने संघ के मूल मंत्र “व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण” पर बात की और एकजुट हिंदू समाज के जरिए समृद्ध और सशक्त भारत के लक्ष्य को दोहराया।
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