Last Updated: October 16, 2026

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गणतंत्र दिवस परेड में कर्तव्य पथ पर दिखाई देगी सेना के ‘मूक योद्धाओं’ की झलक

January 1, 2026

गणतंत्र दिवस परेड में कर्तव्य पथ पर दिखाई देगी सेना के ‘मूक योद्धाओं’ की झलक

नई दिल्ली: गणतंत्र दिवस परेड में इस बार कर्तव्य पथ पर सेना के मार्चिग दस्तों और हथियारों के साथ-साथ देश की रक्षा में प्राणों की बाजी तक लगाने वाले उसके ‘मूक योद्धाओं’ यानी पशु दस्ते की झलक भी देखने को मिलेगी। कर्तव्य पथ पर यह एक विशेष और भावनात्मक दृश्य होगा जिसमें सेना के पशु दस्ते पहली बार इतने बड़े और संगठित रूप में परेड में शामिल होंगे। ये पशु न केवल सेना की ताकत का प्रतीक होंगे बल्कि यह भी बताएंगे कि देश की रक्षा में उनके योगदान को कितनी अहम जगह दी जाती है। सेना के इस विशेष दस्ते में 2 बैक्ट्रियन ऊंट (मंगोलियाई ऊंट), 4 जांस्कर पोनी, 4 शिकारी पक्षी (रैप्टर्स), भारतीय नस्ल के सेना के 10 श्वान और सेना में पहले से काम कर रहे 6 पारंपरिक सैन्य श्वान शामिल होंगे।

पशु दस्ते की अगुवाई बैक्ट्रियन ऊंट करेंगे, जिन्हें हाल ही में लद्दाख के ठंडे रेगिस्तानी इलाकों में तैनात किया गया है। ये ऊंट बहुत ठंडे मौसम और 15,000 फुट से ज्यादा ऊंचाई पर आसानी से आ-जा सकते हैं। ये 250 किलो तक सामान ढो सकते हैं और कम चारे-पानी में लंबी दूरी तय करते हैं। इससे सेना को दूरदराज और कठिन इलाकों में रसद पहुंचाने में बड़ी मदद मिलती है। इसके बाद जांस्कर पोनी कदम से कदम मिलाकर चलेंगी जो लद्दाख की एक दुर्लभ और स्वदेशी नस्ल हैं।

आकार में छोटी होने के बावजूद इनमें जबरदस्त ताकत और सहनशक्ति होती है। ये पोनी शून्य से 40 डिग्री कम तापमान और अत्यधिक ऊंचाई वाले इलाकों में 40 से 60 किलो वजन लेकर चल सकती हैं। येग्र्ष, 2020 से सियाचिन जैसे कठिन क्षेत्रों में सैनिकों के साथ सेवा दे रही हैं और कई बार एक दिन में 70 किलोमीटर तक गश्त करती हैं। परेड में शामिल 4 शिकारी पक्षी (रैप्टर्स) लंबी टांगों वाले बाज सेना की नई और स्मार्ट सोच को दिखाते हैं। इनका इस्तेमाल निगरानी और हवाई सुरक्षा से जुड़े कामों में किया जाता है जिससे सेना के अभियान ज्यादा सुरक्षित रहते हैं। परेड का सबसे भावुक हिस्सा भारतीय सेना के श्वान होंगे जिन्हें प्यार से ‘मूक योद्धा‘ कहा जाता है।

इन श्वान को मेरठ स्थित रिमाऊंट एंड वेटरनरी कोर में प्रशिक्षित किया जाता है। ये आतंकवाद विरोधी अभियानों, विस्फोटक और बारूदी सुरंगों की पहचान, खोज-बचाव कार्यो और आपदा राहत में सैनिकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करते हैं। कई मौकों पर इन श्वान ने अपनी जान की परवाह किए बिना सैनिकों की जान बचाई है। ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत सेना अब मुधोल हाउंड, रामपुर हाउंड, चिप्पीपराई, कोम्बई और राजापलायम जैसी भारतीय नस्लों के कुत्ताें को भी बड़े स्तर पर शामिल कर रही है। यह भारत की अपनी क्षमताओं पर बढ़ते भरोसे का साफ संकेत है।

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